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रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के कन्या छात्रावासों और आश्रमों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण डेटा सामने आया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कुल 1306 स्वीकृत संस्थानों में से 1193 में महिला होमगार्ड कार्यरत हैं, जबकि 113 संस्थानों में अब भी सुरक्षा कर्मियों की कमी बनी हुई है।
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विधानसभा सत्र के दौरान प्रस्तुत जानकारी (प्रश्न संख्या 45) के अनुसार, राज्य सरकार ने कन्या छात्रावासों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होमगार्डों की नियुक्ति का प्रावधान किया है। आंकड़ों का विश्लेषण करने पर सुरक्षा व्यवस्था की जिलावार स्थिति इस प्रकार है:
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शत-प्रतिशत तैनाती वाले जिले बालोद, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, बीजापुर, बिलासपुर, दंतेवाड़ा, धमतरी, दुर्ग, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोंडागांव, कोरबा, कोरिया, महासमुंद, रायगढ़, रायपुर, और शक्ति जैसे जिलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और यहाँ सभी स्वीकृत पदों पर महिला होमगार्ड तैनात हैं।
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सुरक्षा के लिहाज से सबसे कमजोर स्थिति मोहला-मानपुर-अ.चौ. जिले की है, जहाँ 42 स्वीकृत संस्थानों में से 23 में होमगार्ड कार्यरत नहीं हैं। इसके बाद जशपुर (16 पद खाली) और नारायणपुर (12 पद खाली) का नंबर आता है। अन्य प्रभावित जिले बस्तर (8), जांजगीर-चांपा (9), कांकेर (7), और राजनांदगांव (7) में भी सुरक्षा कर्मियों के पद रिक्त चल रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के कन्या छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति
प्रदेश के कुल 33 जिलों में संचालित कन्या छात्रावासों और आश्रमों के लिए कुल 1306 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से वर्तमान में 1193 संस्थानों में महिला होमगार्ड कार्यरत हैं, जबकि 113 पद अभी भी रिक्त पड़े हैं।

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बस्तर जिले में सुरक्षा के लिए कुल 91 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 83 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं और 8 पद रिक्त हैं। जशपुर में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 85 है। यहाँ 69 संस्थानों में होमगार्ड तैनात हैं, जबकि 16 संस्थानों में अभी भी सुरक्षाकर्मियों की कमी है। कांकेर जिले के 73 स्वीकृत पदों में से 66 पर महिला होमगार्ड अपनी सेवाएं दे रही हैं, और यहाँ 7 पद खाली हैं।
इस जिले में सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति सबसे अधिक प्रभावित दिखती है; यहाँ 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 19 होमगार्ड कार्यरत हैं, जिसके कारण 23 पद रिक्त रह गए हैं।जांजगीर-चांपा जिला में कुल 31 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 22 पदों पर तैनाती की गई है और 9 पद वर्तमान में रिक्त हैं।
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बस्तर और जशपुर जैसे संवेदनशील इलाकों के कन्या छात्रावासों में सुरक्षाकर्मियों की कमी छात्राओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े करती है। हालांकि प्रशासन द्वारा अधिकांश जिलों में नियुक्तियां पूरी कर ली गई हैं, लेकिन रिक्त 113 पदों को भरना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि कन्या छात्रावासों की संवेदनशीलता को देखते हुए रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जानी चाहिए ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

