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नई दिल्ली / भुवनेश्वर / गुवाहाटी | मानसून के मौसम में भारत के दो प्रमुख राज्यों—ओडिशा और असम—में बाढ़ ने भयावह तबाही मचाई है। एक तरफ ओडिशा में उफनती महानदी के जलस्तर ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है और तटीय व निचले इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ असम में बाढ़ से भारी तबाही और जनहानि के बीच राज्य सरकार ने प्रभावित नागरिकों को आर्थिक राहत देने के लिए कई बड़े फैसलों की घोषणा की है।
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ओडिशा: महानदी का विकराल रूप, अगले 36 घंटे बेहद नाजुक
ओडिशा में महानदी नदी प्रणाली में मध्यम से भारी बाढ़ की गंभीर आशंका बनी हुई है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि कटक स्थित मुंडाली बैराज से लगभग 9 लाख क्यूसेक पानी का बहाव हो रहा है।
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20 ज़िलों पर असर: हालिया बाढ़ से राज्य के 20 ज़िलों के 7 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
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लाखों का रेस्क्यू: 1.90 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर 520 राहत शिविरों में पहुँचाया गया है।
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जलभराव और तबाही: बालासोर, भद्रक और जाजपुर के 21 गाँव पूरी तरह पानी से घिरे हुए हैं, जबकि 1,352 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अब तक बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में 3 लोगों की जान जा चुकी है।
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संवेदनशील ज़िले: कटक, खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा में बाढ़ का ख़तरा सबसे ज़्यादा है। अथागढ़ और बडंबा क्षेत्रों में निचले इलाक़ों में पानी भर गया है।
जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप कुमार राउत के अनुसार अगले 36 घंटे बेहद संवेदनशील हैं, क्योंकि नदी में जल का प्रवाह अपने चरम स्तर पर पहुँच सकता है। महानदी और उसकी सहायक नदियों के तटबंधों पर एनडीआरएफ, ओडीआरएएफ और पुलिस बलों की निरंतर निगरानी जारी है।
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असम: 80 मौतों की त्रासदी के बीच हिमंत सरकार का बड़ा आर्थिक पैकेज
असम में बाढ़ जनित आपदा से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार वर्तमान में राज्य के 4 ज़िलों के 2.12 लाख से अधिक लोग भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन द्वारा संचालित 112 राहत शिविरों और केंद्रों में 75 हजार से अधिक लोग शरण लिए हुए हैं।
संकट की इस घड़ी में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ प्रभावितों के लिए बड़ी वित्तीय राहत की घोषणा की है:
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6 महीने का मोरेटोरियम: शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट ज़िलों के पात्र क़र्ज़दारों के लिए सभी प्रकार के कर्ज़ (Loan) की किस्तों पर 6 महीने की रोक लगा दी गई है।
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लोन पुनर्गठन: ज़रूरतमंदों के लिए ऋण चुकाने की अवधि को 1 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष तक किया जा सकेगा।
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छोटे कारोबारियों को मदद: जिन दुकानदारों की दुकानें बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई हैं, उन्हें बिना किसी नई गिरवी (Collateral) के ₹10,000 की अतिरिक्त ऋण सहायता मिलेगी।
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सांस्कृतिक स्थलों का पुनर्निर्माण: शिवसागर और चराइदेव के प्रत्येक बाढ़ प्रभावित ‘नामघर’ (पारंपरिक प्रार्थना गृह) के जीर्णोद्धार के लिए ₹1.5 लाख की एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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राहत और बचाव अभियान तेज़
दोनों ही राज्यों में राज्य आपदा मोचन बल और स्थानीय प्रशासन पूरी मुस्तैदी से राहत शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल और चिकित्सा सुविधाएँ पहुँचाने में लगे हैं। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच प्रशासन स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है।

