आज साल 2025 का आखिरी दिन है। बीतता हुआ यह साल छत्तीसगढ़ के इतिहास में कई ऐसी घटनाएं छोड़ गया, जिन्हें आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। यह साल कभी दर्द और शोक लेकर आया, तो कभी बदलाव, विकास और निर्णायक फैसलों का साक्षी बना। राजनीति, प्रशासन, सुरक्षा, संस्कृति और समाज—हर क्षेत्र में कुछ न कुछ ऐसा घटित हुआ जिसने प्रदेश की दिशा और दशा को प्रभावित किया।
साल की शुरुआत ही एक दर्दनाक घटना से हुई, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। बीजापुर जिले के निर्भीक पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या ने लोकतंत्र और पत्रकारिता की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक जनवरी 2025 को लापता हुए मुकेश चंद्राकर का शव दो दिन बाद एक सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार उजागर करने वाले मुकेश को ठेकेदार ने डिनर के बहाने बुलाकर बेरहमी से मार डाला। वे न सिर्फ एक पत्रकार थे, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सच्चाई की आवाज थे। उनकी हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया और पत्रकार सुरक्षा पर बहस छेड़ दी।
साल 2025 ने छत्तीसगढ़ को उसके दो अनमोल रत्न भी छीन लिए। 26 जून को पद्मश्री से सम्मानित हास्य कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे का निधन हो गया। उनकी कविताएं सिर्फ हंसी नहीं, बल्कि समाज को सोचने का आईना देती थीं। वहीं 23 दिसंबर को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हुआ। ‘नौकर की कमीज’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जैसी रचनाओं से उन्होंने आम आदमी की भावनाओं को शब्द दिए। उनका जाना छत्तीसगढ़ की साहित्यिक आत्मा के लिए अपूरणीय क्षति रहा।
साल के दौरान सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़े घटनाक्रम देखने को मिले। अप्रैल महीने में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में रायपुर के कारोबारी दिनेश मिरानिया की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पूरे प्रदेश के लिए गहरा आघात बनी। वहीं दूसरी ओर नक्सल मोर्चे पर सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली। जगदलपुर में एक साथ 210 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद 18 नवंबर को नक्सली लीडर हिड़मा को मुठभेड़ में मार गिराया गया। यह कार्रवाई नक्सल विरोधी अभियान में मील का पत्थर साबित हुई।
नवंबर महीने में बिलासपुर जिले में हुआ रेल हादसा पूरे राज्य को शोक में डुबो गया। लालखदान स्टेशन के पास मेमू ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में 12 यात्रियों की मौत हो गई। इस हादसे में लोको पायलट की भी जान चली गई। यह दुर्घटना रेलवे सुरक्षा पर बड़ा सवाल बनकर उभरी।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी 2025 ऐतिहासिक रहा। छत्तीसगढ़ को 1 जनवरी को नया विधानसभा भवन मिला, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस यह भवन प्रदेश की नई पहचान बना। इसी साल पहली बार राज्य में 14 मंत्रियों का मंत्रिमंडल बना, जो अब तक की सबसे बड़ी कैबिनेट रही।
शराब घोटाले ने भी साल भर सुर्खियां बटोरीं। 3200 करोड़ रुपये के इस घोटाले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा की गिरफ्तारी हुई, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे चैतन्य बघेल को भी जांच एजेंसियों ने गिरफ्तार किया। यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल साबित हुआ।
साल 2025 में रायपुर ने एक और ऐतिहासिक पल देखा, जब पहली बार देश का 60वां DGP-IGP सम्मेलन राजधानी में आयोजित हुआ। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और देशभर के शीर्ष पुलिस अधिकारी शामिल हुए। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अहमियत का प्रतीक बना।
वर्ष के अंत में कांकेर जिले में धर्मांतरण को लेकर हुआ विवाद भी चर्चा में रहा। एक शव दफनाने को लेकर हुई हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिससे क्षेत्र में तनाव फैल गया।
इस तरह 2025 छत्तीसगढ़ के लिए घटनाओं, संघर्षों, उपलब्धियों और बदलावों का साल रहा। यह साल जहां दर्द, शोक और चुनौतियां लेकर आया, वहीं विकास, निर्णायक कार्रवाई और नई शुरुआतों की नींव भी रख गया। आने वाला वर्ष 2026 इन्हीं अनुभवों से सीख लेकर प्रदेश को आगे बढ़ाने की उम्मीदों के साथ दस्तक दे रहा है।

