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नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश के जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की तस्वीर बदलने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के विस्तार पर मिशन मोड में काम कर रही है। केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने राज्यसभा में बताया कि दिसंबर 2025 तक पूरे भारत में कुल 723 एकलव्य विद्यालयों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 499 स्कूल वर्तमान में सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। राजस्थान जैसे राज्यों में जनजातीय शिक्षा की स्थिति काफी मजबूत है, जहाँ स्वीकृत सभी 31 विद्यालय पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं।

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शिक्षा के इस बुनियादी ढांचे को और गति देने के लिए 15 नवंबर, 2025 को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के विशेष अवसर पर देश भर में 42 नए विद्यालयों का उद्घाटन किया गया और 50 स्कूलों की आधारशिला रखी गई। उद्घाटन किए गए स्कूलों में झारखंड (12) और ओडिशा (8) सबसे आगे रहे, जबकि छत्तीसगढ़ और मेघालय जैसे राज्यों में 16-16 नए विद्यालयों की आधारशिला रखकर भविष्य की तैयारियों को पुख्ता किया गया है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी उद्घाटन के माध्यम से जनजातीय छात्रों को शिक्षा की नई सौगातें दी गई हैं।

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सरकार इन विद्यालयों को केवल ईंट-पत्थर की इमारतों तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि इन्हें आधुनिक ज्ञान के केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है। यहाँ छात्रों को स्मार्ट कक्षाओं, सुसज्जित विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और समृद्ध पुस्तकालयों जैसी सुविधाएँ दी जा रही हैं। शिक्षा के साथ-साथ खेलों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके लिए अत्याधुनिक खेल के मैदान और उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही, संगीत, कला और पाठ्येतर गतिविधियों के माध्यम से छात्रों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

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डिजिटल युग की माँग को देखते हुए इन विद्यालयों में तकनीकी शिक्षा का समावेश किया गया है। ‘अमेज़न फ्यूचर इंजीनियर’ (AFE) कार्यक्रम के तहत 298 विद्यालयों में छात्रों को कंप्यूटर विज्ञान, कोडिंग और प्रोग्रामिंग की व्यावहारिक शिक्षा दी जा रही है। लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन के माध्यम से संचालित यह पहल जनजातीय समुदायों के बच्चों को कोडिंग और समस्या समाधान (Problem Solving) जैसे आधुनिक कौशल सिखा रही है, ताकि वे भविष्य के रोजगार अवसरों के लिए तैयार हो सकें। इसके अतिरिक्त, व्यावसायिक प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए छात्रों की रोजगार क्षमता को बढ़ाने पर भी निरंतर काम किया जा रहा है।

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