भारतीय रेल का ‘स्लीपर’ अवतार: अब 180 की रफ्तार और हवाई जहाज जैसी सुविधाओं के साथ पटरी पर उतरेंगी 260 वंदे भारत ट्रेनें

नई दिल्ली: भारतीय रेल ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए रेल पटरियों पर हाथियों के साथ होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हाई-टेक समाधानों और रणनीतिक योजना का एक मजबूत जाल बिछाया है। रेल मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अब हाथियों को पटरियों से दूर रखने के लिए उनके प्राकृतिक व्यवहार का सहारा लिया जा रहा है, जिसके तहत लेवल क्रॉसिंग पर मधुमक्खी की आवाज निकालने वाले उपकरण लगाए गए हैं। चूंकि हाथी मधुमक्खियों की भिनभिनाहट से दूर रहना पसंद करते हैं, इसलिए यह ध्वनि तकनीक उन्हें पटरियों के करीब आने से रोकने में बेहद कारगर साबित हो रही है।

अब पूरी से प्रयागराज को जोड़ने की तैयारी: रेल की पटरियों के बिछने पर सरगुजा बनेगा देश की नई व्यापारिक और आध्यात्मिक धुरी”, बदलेगी तकदीर…

तकनीक के इस सफर में रेलवे यहीं नहीं रुका है; रात के अंधेरे या कम दृश्यता के दौरान पटरियों पर जानवरों की मौजूदगी का सटीक पता लगाने के लिए अब थर्मल विजन कैमरों का परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रणाली लोको पायलटों को समय रहते सतर्क कर देगी, जिससे वे दुर्घटना होने से पहले ही ट्रेन की गति पर नियंत्रण पा सकेंगे। इसके साथ ही, वन विभाग के साथ समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाया गया है, जहाँ तैनात ‘एलिफेंट ट्रैकर्स’ हाथियों की आवाजाही की रीयल-टाइम जानकारी स्टेशन मास्टरों और लोको पायलटों तक पहुँचाते हैं। सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए हाथी गलियारों में विशेष साइनेज बोर्ड लगाए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रेनों के लिए गति सीमा तय कर दी गई है।

सरकारी स्कूलों में ‘कॉन्वेंट’ जैसा लुक: छत्तीसगढ़ के 60 लाख बच्चों को मिलेगी नई यूनिफॉर्म

बुनियादी ढांचे के स्तर पर भी रेलवे ने व्यापक बदलाव किए हैं, जिसमें हाथियों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण और पटरियों की ओर आने से रोकने के लिए बाड़ (Fencing) लगाना शामिल है। पटरियों के आसपास के उन पेड़-पौधों और खाद्य पदार्थों को भी नियमित रूप से साफ किया जा रहा है जो हाथियों को अपनी ओर खींचते हैं, जबकि वन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से चलने वाली एलईडी लाइटें लगाई गई हैं ताकि रात के समय दृश्यता बेहतर रहे। इन निरंतर प्रयासों और वन विभाग के साथ नियमित बैठकों का ही परिणाम है कि पिछले पांच वर्षों में ऐसी घटनाओं की औसत संख्या घटकर मात्र 16 प्रति वर्ष रह गई है। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में अब क्षेत्रीय रेलवे और वन विभाग मिलकर त्वरित जांच करते हैं ताकि भविष्य के लिए ठोस सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जा सकें।

मिशन सक्षम आंगनवाड़ी: अब ‘स्मार्ट’ होंगे आंगनवाड़ी केंद्र, बजट में भारी बढ़ोतरी और 50,000 नए भवनों का लक्ष्य

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version