77वें गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर दिखेगा भारत का शौर्य, संस्कृति और आत्मनिर्भरता का भव्य संगम
नई दिल्ली।
इस बार 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना की पारंपरिक ताकत के साथ-साथ आधुनिक युद्ध तकनीक की झलक भी देखने को मिलेगी। परेड का एक बड़ा आकर्षण सेना के रोबोटिक म्यूल होंगे, जिन्हें आने वाले समय में सैनिकों के लिए कॉम्बैट सपोर्ट सिस्टम के रूप में तैयार किया जा रहा है।
सेना के अनुसार, ये रोबोटिक म्यूल भविष्य में आतंकरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे। खासकर जम्मू-कश्मीर जैसे दुर्गम, पहाड़ी और घने जंगल वाले इलाकों में ये म्यूल सैनिकों से पहले आगे बढ़कर संदिग्ध क्षेत्रों की जांच करेंगे। इनके जरिए दुश्मन की मौजूदगी की जानकारी पहले ही मिल सकेगी, जिससे सैनिकों की जान को जोखिम से दूर रखा जा सकेगा।
करीबी मुठभेड़ों में भी निभाएंगे भूमिका
सेना का कहना है कि आतंकियों की घेराबंदी के बाद इन रोबोटिक म्यूल को करीबी लड़ाई में फायर सपोर्ट के लिए भी तैयार किया जा रहा है। यदि कोई आतंकी किसी इमारत या कमरे में छिपा हो, तो सैनिकों के बजाय म्यूल को अंदर भेजा जा सकेगा। इनमें लगे 360-डिग्री कैमरे और थर्मल सेंसर अंधेरे, धुएं या सीमित दृश्यता की स्थिति में भी आतंकी की सटीक लोकेशन बता सकते हैं।
हालांकि, सेना ने स्पष्ट किया है कि रोबोटिक म्यूल पर लगी राइफलें पूरी तरह मानवीय नियंत्रण में रहेंगी और फायरिंग का अंतिम निर्णय सैनिक ही लेंगे।
फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में देखा जा रहा है
सेना के मुताबिक, इन रोबोटिक म्यूल का उद्देश्य किसी पैदल सैनिक की जगह लेना नहीं, बल्कि खतरनाक परिस्थितियों में सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाना है। सैन्य शब्दावली में इन्हें ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ माना जा रहा है, जो ऑपरेशन की क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
12 से 15 किलो तक रसद ढोने में सक्षम
फिलहाल इन म्यूल्स का इस्तेमाल दुर्गम इलाकों में रसद पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। ये 12 से 15 किलो तक गोला-बारूद, मेडिकल किट और जरूरी सामान ले जा सकते हैं। सीढ़ियां चढ़ना, पथरीले रास्तों, बर्फीले इलाकों और ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चलना इनके लिए आसान है। खास बात यह है कि ये म्यूल –40 डिग्री सेल्सियस की ठंड से लेकर 55 डिग्री की तेज गर्मी में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं। इसके अलावा राहत और बचाव अभियानों में भी इनका उपयोग किया जा रहा है।
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2026-27 में एआई से पूरी तरह होंगे एकीकृत
सेना ने बताया कि 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डेटा-सेंट्रिसिटी वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न सैन्य प्रणालियों को एक-दूसरे से जोड़ा जाएगा। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, किसी सैनिक की तरह मुठभेड़ों में रोबोटिक म्यूल का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए इन्हें पूरी तरह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से एकीकृत किया जाएगा।
कर्तव्य पथ पर रोबोटिक म्यूल की मौजूदगी यह साफ संकेत देती है कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक और नवाचार के साथ खुद को तेजी से तैयार कर रही है।
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