नई दिल्ली: देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन और इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के साथ ही साइबर अपराधियों का जाल भी तेज़ी से फैल रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लोकसभा में पेश किए गए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आधिकारिक आंकड़ों ने देश की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। वर्ष 2021 से 2023 के बीच साइबर अपराधों में लगभग 63% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहाँ 2021 में यह आंकड़ा 52,974 था, वहीं 2023 में यह बढ़कर 86,420 के पार पहुँच गया है।
इन आंकड़ों का राज्यवार विश्लेषण करने पर दक्षिण भारतीय राज्यों की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण नज़र आती है। कर्नाटक इस सूची में शीर्ष पर है, जहाँ साइबर अपराध के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है और यह संख्या 21,889 तक जा पहुँची है। इसी प्रकार तेलंगाना 18,236 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर बना हुआ है। उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश साइबर अपराधियों का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है, जहाँ 10,794 मामले दर्ज किए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बिहार और केरल जैसे राज्यों में भी पिछले एक साल के भीतर दर्ज मामलों की संख्या में अचानक कई गुना उछाल देखा गया है, जो अपराधियों के बदलते कार्यक्षेत्र की ओर इशारा करता है।
साइबर अपराधों की इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने जांच और फोरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए व्यापक निवेश किया है। गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय के अनुसार, वर्तमान में देश भर में 7 केंद्रीय और 27 राज्य स्तरीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं। 2014 के बाद से पुणे, भोपाल और कामरूप जैसे शहरों में नई डिजिटल फोरेंसिक इकाइयों की स्थापना की गई है। इसके अलावा, नई दिल्ली और हाल ही में अगस्त 2025 में असम में अत्याधुनिक ‘राष्ट्रीय डिजिटल जांच सहायता केंद्र’ शुरू किए गए हैं, जो पुलिस अधिकारियों को शुरुआती जांच में तकनीकी मदद प्रदान करते हैं।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ‘निर्भया फंड’ के माध्यम से 20 राज्यों को विशेष वित्तीय सहायता दी है, ताकि वे अपने यहाँ डीएनए और साइबर फोरेंसिक लैब को और अधिक उन्नत बना सकें। अब तक 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं’ शुरू की जा चुकी हैं, जिनके लिए 116.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की गई है। हालाँकि, बुनियादी ढांचे में इस विस्तार के बावजूद साइबर ठगी की बढ़ती जटिलता और रोज़ाना आते हज़ारों मामले प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।



