अरुणाचल प्रदेश के चगलागाम क्षेत्र में बुधवार रात हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे पूर्वोत्तर को झकझोर दिया। हायुलियांग–चगलागाम रोड पर किलोमीटर 40 के पास मजदूरों से भरा ट्रक लगभग 200 मीटर गहरी खाई में गिर गया, जिसकी जानकारी सीमित संचार व्यवस्था के कारण देर से मिल सकी। एकमात्र जीवित बचा मजदूर किसी तरह चलते हुए चिप्रा जीआरईएफ कैंप पहुंचा, तभी पूरी घटना का पता चला।
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चार घंटे की तलाश के बाद दिखा ट्रक
खबर मिलते ही भारतीय सेना की स्पीयर कोर ने सर्च और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। मेडिकल टीम, जीआरईएफ, स्थानीय पुलिस, एनडीआरएफ और प्रशासनिक दलों को मौके पर भेजा गया।
लगभग चार घंटे की कठिन तलाशी, रस्सियों के सहारे नीचे उतरने और घने जंगल को हटाने के बाद सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर ट्रक दिख सका।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल एमएस रावत ने बताया कि अब तक 18 मजदूरों के शव दिखाई दिए और बेल-रोप तकनीक से उन्हें बाहर निकाला जा रहा है। 17 शवों को ऊपर ला लिया गया है और 19 की पहचान की जा चुकी है।
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सभी मजदूर एक ही गांव के थे.यह हादसा और भी दर्दनाक इसलिए है क्योंकि सभी मजदूर असम के तिनसुकिया जिले के गेलापुखुरी टी एस्टेट के रहने वाले थे। वे अरुणाचल प्रदेश में एक हॉस्टल निर्माण कार्य पर लगे हुए थे। मृतकों में बुधेस्वर दीप, राहुल कुमार, समीर दीप, जून कुमार, पंकज मांकी, अजय मांकी, विजय कुमार, अभय भूमिज, रोहित मांकी, बीरेन्द्र कुमार, अगर तांती, धीरन चेटिया, रजनी नाग, दीप ग्वाला, रामचाबक सोनार, सोनाटन नाग, संजय कुमार, करण कुमार और जोनास मुंडा शामिल हैं।
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कठिन इलाके में जारी है खोज अभियान
डिप्टी कमिश्नर स्वप्निल पॉल के अनुसार घटना की सूचना सुबह 11 बजे के करीब मिली। इसके बाद अंजॉ और तेजू के डीसी से तुरंत संपर्क कर संयुक्त अभियान शुरू किया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, घना जंगल और खराब दृश्यता के बावजूद सेना, सिविल प्रशासन और विभिन्न एजेंसियां लगातार शेष मजदूरों की तलाश में जुटी हुई हैं।
यह हादसा पहाड़ी इलाकों में काम कर रहे मजदूरों की कठिन परिस्थितियों और सुरक्षा चुनौतियों को फिर सामने लाता है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज करने के साथ पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है।

