प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में आस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार एक महत्वाकांक्षी धार्मिक सर्किट विकसित करने जा रही है। इस योजना के तहत त्रिवेणी संगम नगरी प्रयागराज को काशी (वाराणसी) और प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या से सीधा जोड़ा जाएगा। आगामी माघ मेले से पहले इस इंटीग्रेटेड धार्मिक सर्किट की शुरुआत करने की तैयारी है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु एक ही यात्रा पैकेज में तीनों प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों के सुगम दर्शन कर सकेंगे।
माघ मेले के दौरान प्रयागराज से काशी-अयोध्या के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था
माघ मेले में हर साल करोड़ों की संख्या में कल्पवासी और तीर्थयात्री संगम की पावन धरा पर पहुंचते हैं। मेला प्राधिकरण ने श्रद्धालुओं की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रारंभिक कार्ययोजना तैयार कर ली है: प्रयागराज मेला क्षेत्र से सीधे काशी और अयोध्या के लिए नियमित व सुगम परिवहन सेवाएं संचालित करने के लिए राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) और संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।तीनों प्रमुख तीर्थ स्थलों के एक सर्किट में जुड़ने से यात्रियों को अलग-अलग टिकट बुकिंग और भटकाव से मुक्ति मिलेगी।
पार्किंग का होगा विस्तार, रेलवे चलाएगा अतिरिक्त ट्रेनें
मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम के अनुसार, पिछले आयोजनों के अनुभवों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार बुनियादी ढांचे का व्यापक विस्तार किया जा रहा है:
मेला क्षेत्र और शहर के सभी प्रमुख प्रवेश मार्गों पर विशाल अतिरिक्त पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम की स्थिति न बने। श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए रेलवे प्रशासन से फीडबैक लेकर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त ट्रेनों के फेरे और अतिरिक्त रैक की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
मेजा में कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र का होगा संरक्षण, विस्थापित परिवारों को मिलेंगे पक्के मकान
धार्मिक सर्किट की तैयारियों के साथ-साथ प्रशासन ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। मेजा तहसील के चांद खमरिया स्थित ‘कृष्ण मृग आरक्षित क्षेत्र’ (Blackbuck Conservation Reserve) को सुरक्षित और विकसित करने की योजना पर मुहर लगाई गई है:
आरक्षित क्षेत्र के भीतर निवासरत परिवारों को विस्थापित कर एक स्थान पर व्यवस्थित आवासीय कॉलोनी बनाकर बसाया जाएगा। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) हर्षिका सिंह को निर्देश दिए गए हैं कि विस्थापित होने वाले सभी पात्र परिवारों को ‘मुख्यमंत्री आवासीय योजना’ के तहत पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएं। मंडलायुक्त ने आरक्षित वन भूमि का अविलंब डी-मार्केशन (सीमांकन) पूरा कर जमीन वन विभाग को सुरक्षित हस्तांतरित करने और क्षेत्र के चारों ओर मजबूत चारदीवारी (बाउंड्री) निर्माण कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कृष्ण मृगों का प्राकृतिक पर्यावास पूरी तरह सुरक्षित रह सके।

