रायपुर
रायपुर जिले में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जीवविज्ञान विषय के 21 व्याख्याताओं ने जिला व संभाग स्तरीय काउंसलिंग में पारदर्शिता की भारी कमी और पदों को जानबूझकर छुपाए जाने का आरोप लगाया है। प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संपूर्ण प्रक्रिया को ही चुनौती दी है।

रिक्त पदों को जानबूझकर नहीं किया गया प्रदर्शित

दिनांक 4 जून 2025 को जिला स्तरीय काउंसलिंग आयोजित की गई थी, जिसमें रायपुर जिले के केवल 6 विद्यालयों के रिक्त पद दिखाए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस सूची में धरसींवा, आरंग और तिल्दा ब्लॉक के किसी भी विद्यालय को शामिल नहीं किया गया।

जबकि धरसींवा के अंतर्गत प्रो. जे एन पांडे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मायाराम सुरजन विद्यालय सहित आरंग के कोरासी स्कूल और तिल्दा ब्लॉक के सतभावा विद्यालय में जीवविज्ञान विषय के व्याख्याता के पद रिक्त हैं। नगर निगम क्षेत्र के मर्ज स्कूलों में भी रिक्तियां हैं, लेकिन इन्हें जानबूझकर छिपाया गया।

संभाग स्तरीय काउंसलिंग में और बढ़ी विसंगतियां

बचे हुए 16 व्याख्याताओं को 8 जून को संभाग स्तरीय काउंसलिंग के लिए बुलाया गया, जिसमें रायपुर जिले के बाहर के 13 विद्यालयों के पद प्रदर्शित किए गए। इनमें से कई विद्यालय न तो एकल शिक्षक हैं और न ही शिक्षकविहीन, बल्कि इन स्कूलों में अन्य विषयों के दर्जनों शिक्षक पहले से पदस्थ हैं।

मनमानी से वरिष्ठ शिक्षकों को किया गया प्रताड़ित

शासकीय हाई स्कूल लाभांडी की चंद्रभान वर्मा, हायर सेकेंडरी स्कूल मोहदी की अपर्णा त्रिपाठी और हाई स्कूल उरकुरा की गायत्री वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें डीईओ और बीईओ की मिलीभगत से गलत तरीके से “अतिशेष शिक्षक” घोषित किया गया है, ताकि पसंदीदा और जूनियर शिक्षकों को बचाया जा सके।

वरिष्ठ शिक्षकों को हटाकर कनिष्ठों को स्कूलों में बनाए रखना, मापदंडों और राज्य सरकार की गाइडलाइन का सरासर उल्लंघन है।


हाईकोर्ट में दायर की गई रिट याचिका

तीनों शिक्षकों ने अधिवक्ता संदीप दुबे के माध्यम से हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की है, जिसमें डीईओ व संभागीय अधिकारियों द्वारा जारी आदेशों को मनमाना, पक्षपातपूर्ण और अवैध ठहराया गया है।याचिका में विशेष रूप से दिनांक 02 अगस्त 2024 के निर्देश खंड 7(सी)(3) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि युक्तियुक्तकरण में वरिष्ठता की अनदेखी की गई है।

राज्य शासन की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों ने कोर्ट में कहा कि स्थानांतरण युक्तियुक्तकरण निर्देशों के अनुसार हुआ है। यदि याचिकाकर्ता को आपत्ति है, तो वे संभागीय समिति के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करें।

हाईकोर्ट कोर्ट के जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की सिंगल बेंच ने शिक्षकों को 5 दिनों के भीतर अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही रायपुर संभाग की युक्तियुक्तकरण समिति को 25 जून को सुनवाई कर याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति को अभ्यावेदन का निपटारा 7 दिनों के भीतर करना होगा और खंड 7(सी)(3) के प्रावधानों का विशेष ध्यान रखा जाए।इसमें छत्तीसगढ़ राज्य, स्कूल शिक्षा विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर,संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर,जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर,विकासखंड शिक्षा अधिकारी, धरसींवा को पक्ष कार बनाया गया है

युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता की भारी कमी, पदों को छिपाना, सीनियर शिक्षकों को हटाना और मनमाने आदेशों ने पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट की सख्ती के बाद अब पूरे प्रदेश की नजर इस मामले की सुनवाई और निर्णय पर टिकी है।

 

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