डिजिटल डेस्क: करीब दो साल की शांति के बाद कोरोना वायरस एक बार फिर दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा रहा है। इस बार सुर्खियों में है नया वैरिएंट BA.3.2, जिसे वैज्ञानिक ‘सिकाडा’ (Cicada) का नाम दे रहे हैं। यह वैरिएंट न केवल अपनी संक्रमण रफ्तार, बल्कि अपने चौंकाने वाले जेनेटिक बदलावों (म्यूटेशन) के कारण विशेषज्ञों के रडार पर है।
70 से ज्यादा म्यूटेशन: क्यों है यह खतरनाक?
वैज्ञानिकों ने इस नए वैरिएंट में 70 से अधिक म्यूटेशन दर्ज किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर जेनेटिक बदलाव वायरस को पहले की तुलना में कहीं अधिक चालाक और संक्रामक बना देते हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार यह वैरिएंट शरीर के इम्यून सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है। जिन लोगों ने वैक्सीन लगवा ली है या जो पहले संक्रमित हो चुके हैं, उनमें भी यह दोबारा संक्रमण फैला सकता है।
दुनिया भर में प्रसार (23 देश प्रभावित)
अमर उजाला और सीडीसी (CDC) की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैरिएंट अब तक 23 से अधिक देशों में फैल चुका है।फिलहाल इस वैरिएंट से सबसे अधिक यूनाइटेड किंगडम (UK) प्रभावित है। अमेरिका के 25 राज्यों के सीवेज के पानी में इस वायरस के लक्षण पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया भर में टेस्टिंग कम होने के कारण वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक हो सकते हैं।
बदला वायरस का पैटर्न: बच्चों को ज्यादा खतरा?
इस वैरिएंट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह बुजुर्गों के बजाय बच्चों को अधिक प्रभावित कर रहा है।
“वायरस अपना वह पुराना पैटर्न तोड़ रहा है जिसमें बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा होता था। अब यह सभी आयु वर्ग, विशेषकर बच्चों में तेजी से फैल रहा है, हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक इसके मामले गंभीर (Severe) श्रेणी में नहीं देखे गए हैं।” — विशेषज्ञों की राय
क्या बूस्टर डोज की पड़ेगी जरूरत?
डॉक्टरों का मानना है कि पिछले दो सालों में वैक्सीनेशन की दर काफी कम हुई है। अधिकांश लोगों को आखिरी टीका लगे काफी समय बीत चुका है, जिससे उनकी एंटीबॉडी का स्तर कम हो गया है। फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियां इसकी निगरानी कर रही हैं, लेकिन अभी तक नई बूस्टर डोज को लेकर कोई अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। हालांकि, संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
फिलहाल संक्रमण की रफ्तार बहुत तेज नहीं है, लेकिन 70 म्यूटेशन वाला यह ‘सिकाडा’ वैरिएंट भविष्य में परेशानी का सबब न बने, इसके लिए विशेषज्ञ लगातार डेटा का अध्ययन कर रहे हैं। सार्वजनिक स्थानों पर सावधानी और स्वच्छता अभी भी सबसे बड़ा बचाव है।

