बलरामपुर: छत्तीसगढ़ में यादव समाज की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच अब नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी क्रम में अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश कुमार यादव ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के समर्थन में खुलकर मोर्चा संभालते हुए रमेश यदु की राजनीतिक गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
महासभा ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि सामाजिक गतिविधियों के नाम पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा पालना यादव समाज को मंजूर नहीं है, क्योंकि समाज की ताकत किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं है।
गजेंद्र यादव को कमजोर करना यानी पूरे समाज को कमजोर करना
राजेश कुमार यादव ने साफ शब्दों में कहा कि गजेंद्र यादव को कमजोर करने की हर कोशिश को सीधे तौर पर यादव समाज को कमजोर करने की साजिश के रूप में देखा जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज गजेंद्र यादव केवल यादव समाज के ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले कैबिनेट मंत्री हैं। उनके काम का मूल्यांकन राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन पर किए गए कार्यों से होना चाहिए।
मंत्री बनने के बाद शिक्षा व्यवस्था पर पूरा फोकस
महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष ने बताया कि गजेंद्र यादव के कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम और ऐतिहासिक कार्य आगे बढ़े हैं।जिसमें हजारों नए पदों पर भर्ती और शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया ने रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं को बड़ी राहत दी है।शिक्षकविहीन स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्कूल भवन और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण बड़े स्तर पर हो रहा है।
राजेश यादव ने कहा, “गजेंद्र यादव के पास सत्ता की बड़ी जिम्मेदारी है और वे उसे अपने कार्यों के जरिए पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। ऐसे जनप्रतनिधि को केवल राजनीतिक विरोध के लिए निशाना बनाना कतई उचित नहीं है।”
रमेश यदु की राजनीतिक सक्रियता को आड़े हाथों लेते हुए राजेश यादव ने कहा कि कुछ चुनिंदा बैठकें, ज्ञापन सौंपना और नेताओं से मुलाकातें कर लेने मात्र से कोई व्यक्ति पूरे यादव समाज का राजनीतिक प्रतिनिधि नहीं बन जाता। उन्होंने दो टूक कहा कि समाज की वास्तविक ताकत गाँवों, कस्बों और आम समाजजनों के बीच बसती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को सामाजिक मंच का इस्तेमाल अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए नहीं करना चाहिए।
“सामाजिक मंच बहुत बड़ा है, जबकि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा बहुत छोटी। यादव समाज को किसी भी व्यक्ति की राजनीतिक प्रयोगशाला बनने नहीं दिया जाएगा।” — राजेश यादव
गजेंद्र यादव समाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि
राजेश यादव ने गर्व महसूस करते हुए कहा कि यादव समाज के लिए यह गौरव की बात है कि समाज का एक बेटा आज प्रदेश सरकार में शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान संभाल रहा है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन तमाम यादव परिवारों और युवाओं की प्रेरणा है जो राजनीति और प्रशासन में आगे बढ़ना चाहते हैं। समाज को ऐसे मजबूत नेतृत्व का साथ देना चाहिए, न कि उसे आपसी खींचतान या व्यक्तिगत समीकरणों के फेर में कमजोर करना चाहिए।
अजय चंद्राकर प्रकरण का जिक्र करते हुए राजेश यादव ने स्पष्ट किया कि उस बयान के बाद यादव समाज ने जिस अभूतपूर्व एकजुटता का परिचय दिया, उसने पूरे प्रदेश को समाज की ताकत का एहसास कराया था। यह किसी एक व्यक्ति या नेता की बपौती नहीं थी, बल्कि प्रदेशभर के यादवों की सामूहिक आवाज थी। इस घटनाक्रम का राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश करना समाज की सामूहिक भूमिका और एकता को छोटा करने जैसा है।
“दम है तो जनसमर्थन चुनाव मैदान में दिखाएं”
रमेश यदु की राजनीतिक दावेदारी पर चुनौती देते हुए राजेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी को अपने प्रभाव और समाज में स्वीकार्यता पर सचमुच भरोसा है, तो उसका सबसे बड़ा पैमाना जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना और जनसमर्थन हासिल करना होना चाहिए। राजनीति सिर्फ कागजी ज्ञापनों और मुलाकातों से नहीं चलती, बल्कि असली ताकत बूथ, गाँव और जनता के बीच पसीना बहाने से दिखती है।
यादव महासभा ने अपने रुख को साफ करते हुए अंत में कहा कि अब समाज भावनात्मक और सतही बयानबाजी से काफी आगे निकल चुका है। समाज यह भली-भांति देखता है कि उसके प्रतिनिधि शिक्षा, रोजगार, विकास और सामाजिक सम्मान के लिए धरातल पर क्या कर रहे हैं।
“गजेंद्र यादव का काम और जिम्मेदारी किसी भी व्यक्ति की क्षुद्र राजनीतिक महत्वाकांक्षा से बहुत बड़ी है। रमेश यदु सामाजिक गतिविधियों को अपनी राजनीतिक पहचान चमकाने का माध्यम न बनाएं। यादव समाज किसी की जागीर नहीं है; इसकी दिशा किसी की महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि सामूहिक सहमति, जनविश्वास और जमीन पर हुए काम तय करेंगे।”


