महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे पावन पर्व है, जो महादेव और माता पार्वती के मिलन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 16 फरवरी, सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार का दिन होने के कारण इस बार यह पर्व भक्तों के लिए और भी अधिक फलदायी और शुभ माना जा रहा है।
शुभ मुहूर्त और समय
पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की रात 10:45 बजे से शुरू होगी और 16 फरवरी की रात 09:10 बजे समाप्त होगी। महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा जिसे निशिता काल मुहूर्त कहते हैं, वह 16 फरवरी की रात 12:09 से लेकर 17 फरवरी की रात 01:01 बजे तक रहेगी।
भक्तों के लिए महत्व
शिव भक्तों के लिए यह दिन आध्यात्मिक चेतना जगाने का अवसर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। पंडितों का मानना है कि इस दिन व्रत रखने और जागरण करने से साधक को काम, क्रोध, लोभ और मोह से मुक्ति मिलती है। यह रात्रि शिव और शक्ति के एकीकरण का प्रतीक है, जो जीवन में संतुलन और शांति लाती है।
पूजा पद्धति और विधि
महाशिवरात्रि की पूजा में सादगी और श्रद्धा का विशेष महत्व है। सुबह जल्दी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मंदिर जाकर या घर पर ही शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक के लिए गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी का प्रयोग करना सर्वोत्तम रहता है। महादेव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते और आक के फूल अर्पित करें। शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं और धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का विधान है, जिसमें रात भर महादेव के अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है।
पंडितों का मत और सिद्ध मंत्र
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार सोमवार को महाशिवरात्रि होने से बेहद शुभ योग बन रहे हैं। पंडितों का कहना है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा से शिवलिंग पर केवल एक लोटा जल और बेलपत्र चढ़ाते हैं, महादेव उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए। इसके अतिरिक्त लंबी आयु और आरोग्य के लिए महामृत्युंजय मंत्र— ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥’ का जाप करना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

