मैनपाट (सरगुजा)। आपने पहाड़ों पर गाड़ियों को अपने आप ऊपर चढ़ते देखा होगा और उल्टी दिशा में बहते झरनों के बारे में भी सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी जमीन देखी है जो गद्दे की तरह दबती है और जब आप उस पर कूदते हैं, तो वह आपको किसी ‘ट्रैम्पोलिन’ की तरह हवा में उछाल देती है?

छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले खूबसूरत हिल स्टेशन मैनपाट में एक ऐसी ही जादुई जगह है, जिसे दुनिया ‘जलजली’ के नाम से जानती है। सोशल मीडिया पर सनसनी मचाने वाली यह जगह अब देश भर के पर्यटकों के लिए कौतूहल का सबसे बड़ा केंद्र बन चुकी है। यहाँ करीब 300 स्क्वायर मीटर के दायरे में पैर रखते ही धरती हिलने लगती है।

जादू नहीं विज्ञान: खुल गया इस ‘हिलती धरती’ का राज

पहली नजर में यह नजारा किसी तिलिस्म या चमत्कार जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने जब इस रहस्यमयी जमीन पर रिसर्च की, तो इसके पीछे का पूरा वैज्ञानिक सच सामने आ गया। यह कोई दैवीय चमत्कार नहीं, बल्कि प्रकृति की अनोखी ‘इंजीनियरिंग’ का नतीजा है।

कैसे बनी यह स्पंजी जमीन?

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जमीन के अनोखे बर्ताव के पीछे ‘पीट सॉयल’ (Peat Soil) का हाथ है। इसके बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है:

  • सैकड़ों सालों की प्रक्रिया: इस पूरे दलदली हिस्से में पिछले कई सौ सालों से सूखी घास, पत्तियां और पेड़-पौधों के अवशेष लगातार जमा हो रहे थे।

  • लचीली परत का निर्माण: ये सारी चीजें बिना सड़े ही मिट्टी के साथ पूरी तरह से मिक्स हो गईं, जिससे जमीन के ऊपर एक बेहद लचीली और स्पंज जैसी परत बन गई।

  • नीचे छुपा है जलस्रोत: इस स्पंजी परत के ठीक नीचे भारी मात्रा में पानी भरा हुआ है।

‘हाइड्रोलिक इफेक्ट’ का कमाल

जब कोई इंसान इस जमीन पर कूदता है, तो उसके वजन के दबाव से यह लचीली मिट्टी तुरंत नीचे की तरफ धंस जाती है। लेकिन जैसे ही पैर हवा में उठता है और दबाव कम होता है, वैसे ही जमीन के अंदर भरा पानी अपनी पूरी ताकत से ऊपर की ओर धक्का मारता है।

विज्ञान की भाषा में इसे ‘हाइड्रोलिक इफेक्ट’ (Hydraulic Effect) कहा जाता है। पानी के इसी तगड़े प्रेशर की वजह से जमीन झटके से वापस ऊपर उठती है और वहाँ खड़ा इंसान हवा में उछल जाता है। मिट्टी और पानी के इसी तालमेल ने इस जगह को एक कुदरती एडवेंचर पार्क बना दिया है।

लैब टेस्ट में क्या निकला? (मिट्टी की रासायनिक संरचना)

वैज्ञानिकों ने जब इस जादुई मिट्टी का लैब में टेस्ट किया, तो इसका सटीक फॉर्मूला सामने आया, जो इस प्रकार है:

घटक (Components) मात्रा (%)
सिल्ट (गाद / मिट्टी के बारीक कण) 80.8%
ऑर्गेनिक फाइबर (जैविक रेशे) 18.0%
क्ले (चीका मिट्टी) 0.9%
रेत (Sand) 0.3%

इस अनोखे मिश्रण के कारण यहाँ की मिट्टी का pH लेवल हमेशा न्यूट्रल (उदासीन) रहता है। यही वजह है कि यह पूरी प्रक्रिया बिना रुके सदियों से लगातार चल रही है और आज मैनपाट आने वाला हर पर्यटक इस ‘हिलती और उछलती’ धरती का लुत्फ उठाए बिना वापस नहीं लौटता।

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