नई दिल्ली: साल का महत्वपूर्ण चंद्र ग्रहण आज सफलतापूर्वक संपन्न हो गया, जिसका गवाह पूरा भारत बना। इस खगोलीय घटना को छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के आसमान में स्पष्ट रूप से देखा गया। जैसे ही चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह समाया, आकाश में एक गहरा लाल और तांबे जैसा रंग बिखर गया, जिसे देखने के लिए लोग अपनी छतों और पार्कों में जमा हुए।
छत्तीसगढ़ में रायपुर और दुर्ग के शहरी इलाकों से लेकर सरगुजा की पहाड़ियों तक ग्रहण का असर साफ दिखा। बिलासपुर और रायगढ़ में मौसम साफ होने की वजह से लोगों ने इस नजारे का भरपूर आनंद लिया, वहीं जशपुर, महासमुंद और रायगढ़ के ग्रामीण अंचलों में भी ग्रहण को लेकर काफी चर्चा रही। ग्रहण खत्म होते ही इन क्षेत्रों के प्रमुख मंदिरों की साफ-सफाई की गई और श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में स्नान किया।
झारखंड की राजधानी रांची समेत जमशेदपुर और धनबाद जैसे बड़े शहरों में विज्ञान प्रेमियों ने टेलिस्कोप के जरिए इस घटना को रिकॉर्ड किया। बोकारो और लातेहार के ऊंचे इलाकों में विजिबिलिटी बहुत अच्छी रही, जबकि गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लोगों ने दान-पुण्य किया।
ओडिशा में इस ग्रहण का खास धार्मिक महत्व दिखा। पुरी और भुवनेश्वर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई, वहीं संबलपुर, झारसुगुड़ा, देवगढ़ और राउरकेला में भी लोगों ने इस अद्भुत नजारे को निहारा।
उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में भी ग्रहण का व्यापक असर रहा। वाराणसी के घाटों और पटना के गंगा तट पर ग्रहण की समाप्ति के बाद भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
मध्य प्रदेश के उज्जैन और भोपाल में भी लोगों ने ग्रहण के नियमों का पालन किया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक दुर्लभ अवसर था जब देश के इतने बड़े हिस्से में चंद्रमा का यह रूप दिखाई दिया। अब सूतक काल समाप्त हो चुका है और सभी धार्मिक स्थलों को आम जनता के लिए फिर से खोल दिया गया है।
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