रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय छात्रावासों और आश्रमों में रहने वाले बच्चों की सेहत, पोषण और शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग ने एक बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित एक उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में प्रदेश के 1000 आश्रम-छात्रावासों में ‘पोषण वाटिकाएं’ विकसित करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य यहां रहने वाले बच्चों को दैनिक आहार में ताजे और पौष्टिक फल-सब्जियां उपलब्ध कराना है। इन वाटिकाओं में आम, अमरूद, जामुन, पपीता, सीताफल और केला जैसे फलदार वृक्षों के साथ-साथ भिंडी, टमाटर, करेला, लौकी, आलू, प्याज और मुनगा जैसी मौसमी सब्जियां उगाई जाएंगी। इससे बच्चों के पोषण स्तर में सुधार होने के साथ ही छात्रावास परिसरों को हरा-भरा और पर्यावरण अनुकूल भी बनाया जा सकेगा।

16 जून से शुरू हुए नए सत्र में ‘आधार बेस्ड अटेंडेंस’ अनिवार्य

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने विभागीय छात्रावास-आश्रमों को शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि यहां बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 16 जून से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी छात्रावास-आश्रमों में बच्चों और स्टाफ की ‘आधार बेस्ड डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम’ को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने सत्र की शुरुआत में ही सभी विद्यार्थियों को पाठ्य-पुस्तकें, गणवेश (यूनिफॉर्म) और अन्य आवश्यक सामग्रियां अनिवार्य रूप से वितरित करने को कहा है।

मुख्यमंत्री की पहल पर बढ़ीं 2000 सीटें, अब कुल क्षमता करीब 2 लाख

बैठक में जानकारी दी गई कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में कुल 3,357 छात्रावास और आश्रम संचालित हो रहे हैं, जिनमें कुल स्वीकृत सीटों की संख्या 1,98,371 है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष पहल और विभागीय मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में इस वर्ष राज्य में लगभग 2,000 नई सीटों की वृद्धि की गई है, जिससे अब और अधिक जरूरतमंद बच्चों को आवासीय शिक्षा का लाभ मिल सकेगा।

भवन निर्माण कार्यों में सुस्ती पर नाराजगी, 31 जुलाई तक का अल्टीमेटम

समीक्षा के दौरान वर्ष 2025-26 में स्वीकृत छात्रावास-आश्रमों के नए भवनों के निर्माण की धीमी प्रगति पर प्रमुख सचिव ने चिंता जताई। अधिकारियों ने बताया कि कुल 254 स्वीकृत कार्यों में से 191 कार्य अभी निर्माणाधीन हैं और 45 कार्य अब तक शुरू ही नहीं हो पाए हैं, जिसके चलते पूर्ण कार्यों का प्रतिशत महज 27% है।

इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए श्री बोरा ने जिलावार प्रगति रिपोर्ट तैयार करने, सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले जिलों की पहचान करने और एक विस्तृत कार्ययोजना बनाकर आगामी 31 जुलाई तक अधिकतम निर्माण कार्यों को हर हाल में पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है। बैठक में मुख्य सचिव के टी.एल. (समय-सीमा) में लंबित मामलों, वित्त विभाग के प्रकरणों और संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत स्वीकृत कार्यों की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

इस महत्वपूर्ण बैठक में विभाग के आयुक्त श्री डी. राहुल वेंकट, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान की संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, अत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री जगदीश कुमार सोनकर सहित संयुक्त सचिव श्री बी.के. राजपूत, श्री अनुपम त्रिवेदी और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारी उपस्थित थे।

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