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नई दिल्ली।
देश के उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में शिक्षा की अलख जगाने वाले और नवाचार को बढ़ावा देने वाले प्रोफेसरों और संकाय सदस्यों के लिए एक बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026’ के लिए आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन नामांकन आमंत्रित कर दिए हैं। इस बेहद प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रक्रिया के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) को संस्थागत भागीदार बनाया गया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के तकनीकी और गैर-तकनीकी उच्च शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और पॉलिटेक्निक कॉलेजों के उन अनुकरणीय शिक्षकों के योगदान को पहचानना और सम्मानित करना है, जिन्होंने न केवल छात्रों का भविष्य संवारा है बल्कि शिक्षा के स्तर को भी ऊंचा उठाया है।
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दो मुख्य श्रेणियों और उप-श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, इस बार राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है, ताकि हर उभरते ज्ञान क्षेत्र को इसमें उचित स्थान मिल सके।
पहली श्रेणी के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) के शिक्षकों को शामिल किया गया है, जिसमें तीन व्यापक उप-श्रेणियां बनाई गई हैं। पहली उप-श्रेणी में इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और वास्तुकला जैसे तकनीकी विषयों के शिक्षकों को रखा गया है। दूसरी उप-श्रेणी शुद्ध विज्ञान के लिए है, जिसमें गणित, भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा और फार्मेसी जैसे विषयों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। वहीं तीसरी उप-श्रेणी कला, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, भाषाएं, विधि अध्ययन, वाणिज्य और प्रबंधन के प्रोफेसरों के लिए तय की गई है। सरकार ने साफ किया है कि विषयों की यह सूची केवल सांकेतिक है; इसमें उच्च शिक्षा से संबंधित कोई भी अन्य उभरता हुआ ज्ञान क्षेत्र शामिल हो सकता है।
दूसरी श्रेणी पूरी तरह से देश के पॉलिटेक्निक संस्थानों के अनुकरणीय शिक्षकों और संकाय सदस्यों के लिए समर्पित की गई है, ताकि तकनीकी हुनर सिखाने वाले शिक्षकों को भी राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिल सके।
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पात्रता के कड़े नियम: कुलपति और निदेशकों के लिए ‘नो एंट्री’
इस सर्वोच्च सम्मान को पूरी तरह निष्पक्ष और केवल सक्रिय शिक्षकों तक सीमित रखने के लिए पात्रता के बेहद सख्त मानदंड तय किए गए हैं। यह पुरस्कार केवल उन्हीं नियमित संकाय सदस्यों के लिए खुला है जिनके पास स्नातक (UG) या स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर कम से कम पांच वर्ष का पूर्णकालिक (Full-Time) शिक्षण अनुभव हो। इसके साथ ही, नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि तक आवेदक की आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
नीति में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी संस्थान के वर्तमान कुलपति, निदेशक और प्रधानाचार्य (चाहे वे नियमित हों या कार्यवाहक) इस पुरस्कार के लिए आवेदन करने के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, ऐसे व्यक्ति जो पहले इन प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं और वर्तमान में केवल सक्रिय सेवा में शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं, वे 55 वर्ष से कम आयु होने पर आवेदन कर सकते हैं।
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जनभागीदारी पर जोर: तीन तरीकों से हो सकेगा नामांकन
इस बार पुरस्कार प्रक्रिया को अधिक समावेशी और जनभागीदारी (Public Participation) पर आधारित बनाने के लिए नामांकन के तीन अलग-अलग विकल्प दिए गए हैं। योग्य शिक्षक खुद आगे आकर ‘स्व-नामांकन’ (Self-Nomination) कर सकते हैं। इसके अलावा, संबंधित उच्च शिक्षा या पॉलिटेक्निक संस्थानों के प्रमुख (निदेशक, प्रिंसिपल या कुलपति) भी अपने सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों का ‘संस्थागत नामांकन’ कर सकते हैं। तीसरा और सबसे अनोखा तरीका ‘सहकर्मी नामांकन’ (Peer-Nomination) का है, जिसके तहत उसी संस्थान में कार्यरत अन्य नियमित सहकर्मी शिक्षक भी अपने किसी योग्य साथी के नाम की सिफारिश कर सकते हैं।
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5 जुलाई तक खुलेगा पोर्टल, पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रकार के नामांकन केवल डिजिटल माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदकों या सिफारिशकर्ताओं को भारत सरकार के आधिकारिक राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल awards.gov.in पर जाकर निर्धारित प्रारूप में अपनी प्रविष्टियां दर्ज करनी होंगी।
इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए ऑनलाइन नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 05 जुलाई 2026 तय की गई है। शिक्षा मंत्रालय ने सभी पात्र और नवाचारी शिक्षकों से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें, ताकि देश निर्माण में उनके योगदान को राष्ट्रीय पटल पर सराहा जा सके।


