डिजिटल भारत 2026: हर जिले में 5G, हर पंचायत में इंटरनेट और धोखाधड़ी करने वालों पर सीधा प्रहार
दिल्ली: देश में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता की रक्षा के लिए सरकार ने अपनी कानूनी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बना दिया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी कि जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के साथ-साथ अब ‘पर्यावरण समीक्षा नियम 2025’ को अधिसूचित किया गया है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण सुरक्षा उपायों के अनुपालन को और अधिक पारदर्शी बनाना है।
इस नई व्यवस्था के तहत, अब पंजीकृत पर्यावरण समीक्षा विशेषज्ञों के माध्यम से उद्योगों और परियोजनाओं के उत्सर्जन और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों की व्यवस्थित जाँच की जाएगी। यह संरचित प्रक्रिया केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा की जा रही मौजूदा निगरानी में एक सहायक की भूमिका निभाएगी, जिससे नियमों के उल्लंघन की पहचान करना और उन्हें रोकना अधिक सरल हो जाएगा।
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सरकार ने नियमों की अनदेखी करने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़े आर्थिक दंड की व्यवस्था भी की है। अब पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और वायु व जल अधिनियमों के तहत जारी निर्देशों का उल्लंघन करने पर न्यूनतम दस लाख रुपये से लेकर पंद्रह लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकारों के पास यह अधिकार सुरक्षित है कि वे प्रदूषण फैलाने वाले किसी भी उद्योग या प्रक्रिया को बंद करने, या उनकी बिजली और पानी जैसी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को रोकने के निर्देश जारी कर सकें।
अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में स्थानीय निकायों की भूमिका को भी नई परिभाषा दी गई है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के तहत अब नगर निकायों और पंचायतों के लिए घर-घर से कचरा इकट्ठा करना, उसका वर्गीकरण करना और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से प्रसंस्करण करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसी तरह, निर्माण और विध्वंस से निकलने वाले मलबे के प्रबंधन के लिए 2025 के नए नियम लागू किए गए हैं, जिनमें नियमों का पालन न करने वाली निर्माण एजेंसियों पर ‘पर्यावरण मुआवजा’ लगाने का निर्देश दिया गया है।
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विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कोयला खदानों के लिए सरकार ने तृतीय पक्ष समीक्षा की व्यवस्था की है। इसमें आईआईटी-आईएसएम और नीरी (NEERI) जैसी प्रतिष्ठित एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि खदानों का संचालन पर्यावरण मंजूरी की शर्तों के अनुरूप ही हो रहा है। इसके अलावा, प्लास्टिक, बैटरी, ई-अपशिष्ट और बायो-मेडिकल कचरे के लिए भी अलग-अलग विशेष नियम लागू किए गए हैं, जो स्थानीय निकायों को इन कचरों के वैज्ञानिक निपटान और पुनर्चक्रण के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार बनाते हैं।
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मंत्री महोदय ने स्पष्ट किया कि इन सभी कदमों का मूल उद्देश्य एक ऐसी जवाबदेह प्रणाली विकसित करना है, जहाँ ऑनलाइन पोर्टलों और नियमित ऑडिट के माध्यम से देश की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखा जा सके। यह एकीकृत तंत्र सुनिश्चित करता है कि विकास की गति के साथ-साथ पर्यावरण मानकों से कोई समझौता न हो।

