**जशपुर।** छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक संवर्ग के वेतनमान संबंधी हालिया सरकारी आदेश ने शिक्षकों के बीच भारी असमंजस और आक्रोश की स्थिति पैदा कर दी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी 9 जून 2026 के उस आदेश पर कड़ा विरोध जताया है, जिसमें कर्मचारियों से क्रमोन्नत या समयमान वेतनमान का विकल्प मांगा गया है। फेडरेशन का स्पष्ट कहना है कि सहायक शिक्षकों के लिए यह विकल्प चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से तर्कहीन और अव्यावहारिक है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी, जिला अध्यक्ष विनोद गुप्ता और महामंत्री संजीव शर्मा ने इस मामले में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि विभाग का यह आदेश मौजूदा नियमों और सहायक शिक्षकों की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता है। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासकीय कर्मचारियों के लिए क्रमोन्नति की जो योजना मध्यप्रदेश शासन के समय से चली आ रही थी, उसके अंतर्गत प्रथम नियमित नियुक्ति से 12 एवं 24 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर क्रमोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद सामान्य प्रशासन विभाग के 24 अप्रैल 2006 के आदेश द्वारा शिक्षक संवर्ग के लिए वेतनमान में वृद्धि का प्रावधान किया गया था, जिसमें सहायक शिक्षकों के लिए 12 एवं 24 वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति के समान वेतनमान निर्धारित किए गए थे।
फेडरेशन का मुख्य विरोध इस बात को लेकर है कि वित्त विभाग द्वारा 28 अप्रैल 2008 को जारी निर्देशों के तहत जो समयमान वेतनमान योजना लागू की गई, वह सहायक शिक्षक संवर्ग पर पूरी तरह लागू ही नहीं होती। पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि व्याख्याता, उच्च वर्ग शिक्षक और प्राचार्य संवर्ग को समयमान वेतनमान का लाभ पहले से ही स्वीकृत है, जबकि सहायक शिक्षक संवर्ग को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान का लाभ अब तक स्वीकृत ही नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में यदि कोई सहायक शिक्षक समयमान वेतनमान का विकल्प चुनता है, तो उसे मिलने वाला लाभ शून्य है क्योंकि वह लाभ योजना अभी उनके संवर्ग के लिए अस्तित्व में ही नहीं है।
इसके विपरीत, यदि कोई सहायक शिक्षक क्रमोन्नति योजना का विकल्प चुनता है, तो उसे अन्य शासकीय सेवकों की भांति तृतीय उच्चतर वेतनमान का लाभ नहीं मिल पाएगा, जो कि उनके साथ बड़ा अन्याय है। फेडरेशन का कहना है कि यह स्थिति सहायक शिक्षकों को एक ऐसी उलझन में डाल रही है जहाँ वे किसी भी विकल्प का चयन करें, उन्हें नुकसान ही उठाना पड़ेगा। समयमान वेतनमान के नियमों के अनुसार इसके लाभ हेतु सेवाकाल की गणना सेवा में प्रवेश की तिथि से की जाती है, लेकिन सहायक शिक्षकों को त्रिस्तरीय लाभ से वंचित रखकर विकल्प मांगना सरकारी प्रक्रिया की बड़ी विसंगति को दर्शाता है।
इस गंभीर विसंगति को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। फेडरेशन ने सरकार से आग्रह किया है कि जब तक सहायक शिक्षक संवर्ग के लिए त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान का स्पष्ट और विधिवत आदेश जारी नहीं हो जाता, तब तक विकल्प लेने की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। साथ ही, फेडरेशन ने यह भी मांग रखी है कि इस पूरी प्रक्रिया की जटिलता को देखते हुए विकल्प फॉर्म जमा करने की अंतिम तिथि में भी वृद्धि की जाए, ताकि किसी भी शिक्षक का आर्थिक नुकसान न हो।

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