सीतापुर/सरगुजा। विकासखंड शिक्षा कार्यालय (BEO Office) सीतापुर में व्याप्त भ्रष्टाचार, शिक्षकों से रिश्वतखोरी और घोर प्रशासनिक लापरवाही की लगातार मिल रही शिकायतों पर जिला शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) डॉ. दिनेश कुमार झा ने सीतापुर के प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दो दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
शिक्षकों से काम के बदले पैसे मांगने का आरोप, एसोसिएशन ने की थी शिकायत
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने डीईओ कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि सीतापुर ब्लॉक में शिक्षकों के नियमित कार्यालयीन कार्यों के बदले खुलेआम अवैध राशि की मांग की जा रही है। शिकायत में बीईओ के साथ-साथ कार्यालय के दो लिपिकों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिक्षकों का आरोप है कि राशि न देने पर महीनों तक जरूरी फाइलों को अटका कर रखा जाता है।
डीईओ के नोटिस में शामिल चार प्रमुख गंभीर बिंदु:
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अवकाश व वेतन भुगतान में देरी: शिक्षकों के अर्जित अवकाश (Earned Leave) और मेडिकल अवकाश की स्वीकृति तथा वेतन भुगतान के मामले 5-6 महीने से लेकर एक साल तक लंबित रखे गए हैं। आरोप है कि इनके निपटारे के लिए रिश्वत मांगी जाती है।
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फाइलें व दस्तावेज गायब: कई शिक्षकों के अवकाश आवेदन और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट कार्यालय से गायब होने की बात सामने आई है।
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पावती देने से इनकार: बीईओ कार्यालय के आवक-जावक (Inward-Outward) काउंटर पर शिक्षकों के वैध आवेदन लेने से मना कर दिया जाता है, जिससे शिक्षकों को आवेदन की रिसीविंग (पावती) तक नहीं मिल पा रही है।
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नियमितीकरण व जीपीएफ में अड़ंगा: परिवीक्षा अवधि पूरी कर चुके शिक्षकों के नियमितीकरण प्रस्ताव उच्च कार्यालय भेजने, परीक्षा अनुमति आदेश, सर्विस बुक संधारण और जीपीएफ (GPF) पासबुक अपडेट करने में जानबूझकर देरी की जा रही है और इसके एवज में राशि की मांग की जा रही है।
सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन, एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी
डीईओ डॉ. दिनेश कुमार झा ने नोटिस में दो टूक कहा है कि शासकीय कार्यों के संपादन में इस प्रकार का आचरण घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, जो ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ का स्पष्ट उल्लंघन है। डीईओ ने पूछा है कि इस कृत्य के लिए क्यों न बीईओ के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तो मामले में एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए बीईओ स्वयं जिम्मेदार होंगे।
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