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छत्तीसगढ़: तौल यंत्रों की जांच में आई तेजी, सरकारी राजस्व में 48% का उछाल
रायपुर। छत्तीसगढ़ में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए विभाग द्वारा तौल यंत्रों की जांच और खाद्य पदार्थों के वजन की निगरानी में बड़ी सफलता मिली है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल के भीतर दर्ज किए गए प्रकरणों और उनसे प्राप्त राजस्व में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्ष 2023-24 में जहां कुल 715 मामले दर्ज किए गए थे, वहीं वर्ष 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 946 तक पहुंच गई है। इस सक्रियता का सीधा असर सरकारी खजाने पर भी पड़ा है। पिछले वर्ष प्राप्त ₹44,47,500 के राजस्व की तुलना में इस वर्ष ₹66,18,700 का संग्रह हुआ है, जो लगभग 48% की वृद्धि को दर्शाता है।
जिलावार प्रदर्शन पर नजर डालें तो राजधानी रायपुर इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 217 मामलों के माध्यम से ₹18.83 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ। दुर्ग और राजनांदगांव जैसे जिलों में भी पिछले वर्ष की तुलना में जांच की कार्रवाई में काफी तेजी आई है। आंकड़ों की सबसे सकारात्मक बात यह रही कि दर्ज किए गए सभी 946 प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर लिया गया है और वर्तमान में एक भी मामला लंबित नहीं है। हालांकि, सुकमा, बीजापुर और मोहला-मानपुर जैसे कुछ जिलों में पिछले दो वर्षों से कोई भी नया प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है।
उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में तौल यंत्रों की जांच और राजस्व वसूली के मामले में रायगढ़ सबसे अग्रणी रहा है। रायगढ़ में वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 43 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनसे ₹3,16,100 का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष के ₹1,96,000 की तुलना में काफी अधिक है। वहीं सरगुजा जिले में इस साल 19 मामलों के जरिए ₹1,43,000 की वसूली की गई। जशपुर जिले में भी सक्रियता बढ़ी है, जहाँ पिछले साल के 3 प्रकरणों के मुकाबले इस साल 11 मामले दर्ज हुए और ₹77,500 का राजस्व मिला। बलरामपुर जिले में स्थिति स्थिर बनी हुई है, जहाँ इस वर्ष 4 प्रकरणों के माध्यम से ₹14,000 का राजस्व अर्जित किया गया।
बस्तर संभाग की स्थिति
दक्षिण छत्तीसगढ़ यानी बस्तर संभाग के जिलों में व्यापारिक जांच और प्रकरणों की संख्या अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई है। जगदलपुर (बस्तर) जिले में वर्ष 2024-25 में कुल 15 मामले दर्ज कर ₹1,03,500 का राजस्व वसूला गया, जो पिछले वर्ष के ₹81,000 से अधिक है। दंतेवाड़ा जिले में भी सुधार देखा गया है, जहाँ पिछले साल के शून्य के मुकाबले इस साल 3 प्रकरण दर्ज कर ₹22,000 वसूले गए। कांकेर जिले में इस वर्ष 4 मामलों में ₹32,000 का राजस्व मिला। हालांकि, संभाग के सुदूर जिलों जैसे सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और कोंडागांव में पिछले दो वर्षों के दौरान एक भी प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है और यहाँ से प्राप्त राजस्व भी शून्य रहा है।

