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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, सरकार अब तक 21 किस्तों के जरिए 4.09 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि सीधे किसानों की जेब में पहुंचा चुकी है। लेकिन, तकनीक की इस रफ़्तार के बीच एक बड़ी बाधा सामने आई है—आधार सीडिंग। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के लगभग 30.18 लाख किसानों का बैंक खाता अब भी आधार से नहीं जुड़ा है, जिसके कारण उनकी किस्तें अधर में लटकी हुई हैं।
बिचौलिये खत्म, लेकिन ‘आधार’ जरूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना पूरी तरह बिचौलियों से मुक्त है। पैसा सीधे DBT के जरिए आधार-लिंक्ड खातों में जाता है। कृषि राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि आधार सीडिंग न होना ही भुगतान रुकने का सबसे बड़ा कारण है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जैसे ही किसान अपना खाता आधार से लिंक कराता है, उसका पुराना बकाया (बकाया किस्तें) तुरंत उसके खाते में भेज दिया जाता है।
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यूपी में सबसे बुरा हाल: 10 लाख से ज्यादा किसान पेंडिंग
आधार-बैंक लिंक न होने के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जहाँ 10.44 लाख से अधिक किसानों का डेटा पेंडिंग है। इसके बाद गुजरात (2.90 लाख), राजस्थान (2.13 लाख) और मध्य प्रदेश (1.87 लाख) जैसे राज्य आते हैं। बिहार और महाराष्ट्र में भी लाखों किसानों की सीडिंग अधूरी है। यह आंकड़ा चेतावनी है कि अगर समय रहते बैंक जाकर आधार लिंक नहीं कराया गया, तो अगली किस्त का लाभ नहीं मिलेगा।
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रुकी हुई किस्त पाने के लिए क्या करें?
किसानों की इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार अब ‘वार फुटिंग’ (युद्ध स्तर) पर काम कर रही है: कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ मिलकर गांव-गांव कैंप लगाए जा रहे हैं। पेंडिंग लिस्ट वाले किसानों को उनके मोबाइल पर सीधे मैसेज भेजे जा रहे हैं। किसान खुद पीएम-किसान पोर्टल पर जाकर अपनी ‘Aadhaar Seeding Status’ चेक कर सकते हैं।
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राज्यों का ‘पेंडिंग’ स्कोरकार्ड (प्रमुख राज्य):
| राज्य | पेंडिंग किसान (संख्या) |
| उत्तर प्रदेश | 10,44,200 |
| गुजरात | 2,90,358 |
| राजस्थान | 2,13,779 |
| मध्य प्रदेश | 1,87,011 |
| महाराष्ट्र | 1,72,349 |
| बिहार | 1,39,430 |

