“पाँच स्तंभ, एक लक्ष्य: विकसित भारत और नेट जीरो के लिए नीति आयोग का मास्टर प्लान।”
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (CCTNS) ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को एक नई ऊंचाई पर पहुँचा दिया है। 10 फरवरी 2026 को लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, अब देश के सभी 17,792 पुलिस थाने इस हाई-टेक नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ चुके हैं। यह प्रणाली लगभग रियल टाइम में अपराध और अपराधियों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने में सक्षम है, जिससे कानून व्यवस्था को बनाए रखना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।
अब पुलिस की पूरी प्रक्रिया, जिसमें शिकायत दर्ज करने से लेकर चार्जशीट और कोर्ट के फैसले तक के विवरण शामिल हैं, पूरी तरह कंप्यूटरीकृत हो चुकी है। इस सिस्टम के आने से पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों, जेलों और अदालतों के बीच डेटा साझा करना सरल हो गया है, जिससे न्याय प्रक्रिया में तेज़ी आई है। नागरिकों के लिए भी यह बदलाव किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि अब वे डिजिटल पुलिस पोर्टल के माध्यम से लापता लोगों की खोज, वाहन एनओसी और घोषित अपराधियों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, राज्य स्तर पर भी नागरिक सेवाओं को बेहद सुलभ बना दिया गया है। अब आम जनता घर बैठे अपनी एफआईआर की कॉपी पा सकती है, अपनी शिकायतों का स्टेटस जान सकती है और पासपोर्ट या नौकरी के लिए ज़रूरी वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकती है। इस डिजिटल क्रांति ने न केवल पुलिस और जनता के बीच की दूरी कम की है, बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की है। गृह राज्य मंत्री श्री बंडी संजय कुमार ने इस सफलता को आधुनिक और सुरक्षित भारत की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।

