छत्तीसगढ़ में बिजली के उपयोग और बिल भुगतान की पूरी व्यवस्था अब एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। राज्य सरकार ने बिजली वितरण कंपनी के उस कड़े प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है जिसके तहत अब प्रदेश में “पहले रिचार्ज और फिर बिजली” का नियम लागू होगा। इस नई व्यवस्था का सीधा मतलब यह है कि अब बिजली का उपयोग करने के लिए उपभोक्ताओं को मोबाइल फोन की तरह ही एडवांस में भुगतान करना होगा। योजना के पहले चरण में उन सरकारी विभागों को निशाने पर लिया गया है जिनका करोड़ों का बकाया बिजली कंपनी के लिए लंबे समय से बड़ी मुसीबत बना हुआ है।
आंकड़ों की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बोझ पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ा है। अगस्त 2024 में जो बकाया 1,988 करोड़ रुपये था वह वर्तमान में 3,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है और आशंका है कि मार्च के अंत तक यह बढ़कर 3,500 करोड़ रुपये तक पहुँच जाएगा। इसमें सबसे बड़ी देनदारी नगरीय निकायों और विकास विभागों की है। इसी वित्तीय संकट से उबरने के लिए बिजली कंपनी ने ब्लॉक स्तर के सभी 1.72 लाख सरकारी कनेक्शनों को प्रीपेड मोड पर डालने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रदेश में अब तक करीब 1.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और बाकी बचे 22 हजार मीटरों को पंचायत व आंगनबाड़ी केंद्रों में युद्ध स्तर पर लगाया जा रहा है।
एक अप्रैल से प्रभावी होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी विभागों को अपने औसत मासिक खर्च के आधार पर तीन महीने की राशि अग्रिम जमा करनी होगी। यदि समय रहते रिचार्ज नहीं कराया गया तो सिस्टम के जरिए बिजली अपने आप गुल हो जाएगी। पुराने बकाये को निपटाने के लिए सरकार ने विभागों के बजट से किस्तों में भुगतान की व्यवस्था की है जिससे कंपनी को 600 करोड़ रुपये की पहली किस्त प्राप्त भी हो चुकी है। सरकारी विभागों में इस सफल प्रयोग के बाद बिजली कंपनी की योजना इसे चरणबद्ध तरीके से आम उपभोक्ताओं पर भी लागू करने की है जिससे बिल वसूली में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आएगी और बकाया की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

