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नई दिल्ली | 08 फरवरी, 2026
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने स्कूली बच्चों के आधार डेटा को अपडेट करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ‘मिशन-मोड’ के तहत चलाए गए विशेष अभियान के माध्यम से मात्र 5 महीनों के भीतर देश भर के 83,000 स्कूलों में एक करोड़ से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (MBU) सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।
यह अभियान सितंबर 2025 में ‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’ (UDISE+) के साथ तकनीकी एकीकरण के बाद शुरू हुआ था। इस सिस्टम की मदद से उन बच्चों की पहचान करना बेहद आसान हो गया जिनका बायोमेट्रिक अपडेट पेंडिंग था। इसके बाद, UIDAI के क्षेत्रीय कार्यालयों ने राज्य शिक्षा विभागों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर स्कूलों में ही शिविरों का आयोजन किया।
अपडेट क्यों है अनिवार्य?
UIDAI के अनुसार, 5 साल से कम उम्र के बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस (पुतली) पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। इसलिए, 5 से 15 वर्ष की आयु के बीच आधार में बायोमेट्रिक डेटा को अपडेट करना अनिवार्य होता है। यदि यह अपडेट नहीं किया जाता, तो छात्रों को भविष्य में NEET, JEE, CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरने और विभिन्न सरकारी छात्रवृत्तियों का लाभ लेने में प्रमाणीकरण (Authentication) संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
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अभिभावकों को राहत देते हुए, UIDAI ने 7 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 1 अक्टूबर 2025 से एक वर्ष के लिए इस सेवा को निःशुल्क कर दिया था। इसके अलावा 5-7 और 15-17 वर्ष के बच्चों के लिए यह सुविधा पहले से ही मुफ्त है।
UIDAI के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक देश के सभी पात्र स्कूली बच्चों को इसके दायरे में नहीं लाया जाता। स्कूलों के साथ-साथ आधार केंद्रों पर भी इसी अवधि में लगभग 1.3 करोड़ बच्चों ने अपना पंजीकरण कराया है।

