छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पदस्थ रहे पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एल.पी. पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई कलेक्टर द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन और शिक्षा संभाग बिलासपुर के संयुक्त संचालक की अनुशंसा के आधार पर की गई है।
क्या हैं मुख्य आरोप?
जारी नोटिस में अधिकारी पर कई गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। आरोपों के अनुसार, पद पर रहते हुए उन्होंने विभागीय नियमों और शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों की पदस्थापना और स्थानांतरण में मनमानी की। बिना सक्षम स्वीकृति के किए गए इन निर्णयों से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई, बल्कि विभागीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन
मामले का सबसे अहम पहलू विद्यालयों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) से जुड़ा है। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट के अनुसार, रेंगपुरा और सहसपुर शालाओं के बीच दूरी 0.8 किलोमीटर पाई गई, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप थी। बावजूद इसके, दोनों शालाओं के एकीकरण (मर्जर) के प्रस्ताव को नियमों के विपरीत आगे बढ़ाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि राज्य स्तर की समिति द्वारा तय मापदंडों—जैसे 500 मीटर से अधिक दूरी की शर्त—की अनदेखी करते हुए यह निर्णय लिया गया, जिससे शासन के निर्देशों का उल्लंघन हुआ।
प्रशासनिक आचरण पर भी सवाल
नोटिस में अधिकारी के कार्यशैली को लापरवाही, अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति उदासीनता का परिचायक बताया गया है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों का उल्लंघन माना गया है। विभाग ने इसे गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
7 दिन में देना होगा जवाब
लोक शिक्षण संचालनालय ने संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे 7 दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
सामाजिक स्तर पर भी उठा मामला
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा इसकी शिकायत की गई, जिसके बाद जिला प्रशासन ने जांच कराई। कलेक्टर की रिपोर्ट में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद ही उच्च स्तर पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ।
शिक्षा विभाग में हुई इस कार्रवाई को शासन की सख्त प्रशासनिक नीति का संकेत माना जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि नियमों की अनदेखी और मनमानी फैसलों पर अब कड़ी निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में अधिकारी के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी, जिस पर पूरे विभाग और जिले की नजरें टिकी हुई हैं।

