रायपुर, 15 जनवरी 2026: छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर जारी धान खरीदी प्रक्रिया में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। पारदर्शिता और नियमों के पालन में कोताही बरतने वाले समिति प्रबंधकों और खरीदी से जुड़े 38 कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कदम उठाए गए हैं। इस कार्रवाई में 31 कर्मचारियों का निलंबन, तीन पर एफआईआर (FIR) और एक की सेवा समाप्ति सहित अन्य दंडात्मक कदम शामिल हैं।
12 जिलों में जांच और सख्त कार्रवाई
खाद्य विभाग द्वारा प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों—दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती, जगदलपुर, रायपुर, गरियाबंद, महासमुंद और बलौदाबाजार-भाटापारा में सघन निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान धान के स्टॉक में कमी, अमानक धान की खरीदी, फर्जी टोकन, किसानों से अवैध वसूली और सरकारी निर्देशों के उल्लंघन जैसे गंभीर मामले सामने आए।
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प्रमुख जिलों में हुई कार्रवाई का विवरण:
* दुर्ग और बेमेतरा: दुर्ग जिले में स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर झीट, गोढ़ी, खिलोराकला सहित अन्य केंद्रों के प्रबंधकों को निलंबित किया गया। बेमेतरा में अमानक धान खरीदी और फर्जीवाड़े के आरोप में सहायक प्रबंधक उमेश कुमार साहू पर निलंबन के साथ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
* बिलासपुर और कबीरधाम: बिलासपुर के एरमसाही केंद्र प्रभारी पर 920 बोरों की कमी पाए जाने पर एफआईआर दर्ज हुई है। वहीं कबीरधाम के कुकदूर केंद्र में भी स्टॉक में गड़बड़ी पर कड़ी कार्रवाई की गई।
* रायपुर और सक्ती: रायपुर के नरदहरा में किसानों से अवैध वसूली के मामले में ऑपरेटर राकेश जांगड़े की सेवा समाप्त कर दी गई है। सक्ती जिले में बिना आवक पर्ची के धान खरीदी करने पर केंद्र प्रभारी को सेवा से पृथक किया गया है।
* जांजगीर और महासमुंद: जांजगीर-चांपा में छुट्टी के दिन धान की आवक लेने और टोकन में अनियमितता पर कर्मचारियों को निलंबित किया गया। महासमुंद में अनियमितता के दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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खाद्य विभाग के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कुल 11 मामले धान खरीदी में अनियमितता के, 5 मामले स्टॉक में कमी के और 5 मामले अमानक धान खरीदी के पाए गए। इसके अलावा बारदाना वितरण और स्टेकिंग में लापरवाही पर भी कार्रवाई की गई है।
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राज्य सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धांधली या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। किसानों के हितों की रक्षा और सरकारी संसाधनों के सही प्रबंधन के लिए शासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
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