नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (National Scholarship Portal – NSP) पर छात्रवृत्ति आवंटन के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी पात्र छात्र को सिर्फ इसलिए मेरिट छात्रवृत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा क्योंकि वह पहले से कोई कल्याण-आधारित छात्रवृत्ति ले रहा है। इसी प्रकार मेरिट छात्रवृत्ति पाने वाले मेधावी छात्र भी नियमानुसार अपनी श्रेणी की कल्याण-आधारित छात्रवृत्ति के पात्र बने रहेंगे।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने इस संबंध में सर्कुलर जारी कर सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे नए नियमों की जानकारी पात्र विद्यार्थियों, अभिभावकों और संबंधित हितधारकों तक तत्काल पहुंचाएं।
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क्यों पड़ा बदलाव की जरूरत? यह निर्णय विभिन्न सरकारी मंत्रालयों और विभागों के बीच पात्रता को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को समाप्त करने के लिए लिया गया है। वर्ष 2024-25 में एनएसपी पोर्टल पर डुप्लिकेशन (दोहरे आवेदन) हटाने की तकनीकी प्रक्रिया के दौरान कई वास्तविक और योग्य छात्रों को गलती से ‘डुप्लिकेट लाभार्थी’ के रूप में चिह्नित कर दिया गया था, जिससे उन्हें लाभ मिलने में बाधा आई थी।
छात्रवृत्तियों का दो श्रेणियों में वर्गीकरण: नियमों में पूर्ण पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए योजनाओं को दो मुख्य वर्गों में विभाजित किया गया है:
मेरिट-आधारित स्कॉलरशिप (Merit-based):उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन, रैंक या प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के आधार पर दी जाने वाली योजनाएं। इसमें नेशनल मीन्स-कम-मेरिट स्कॉलरशिप स्कीम (NMMSS), सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप स्कीम और INSPIRE जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं।
कल्याण-आधारित स्कॉलरशिप (Welfare-based): आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक वर्गों के उत्थान के लिए दी जाने वाली सहायता राशि। इसमें SC, ST, OBC और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संचालित प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप शामिल हैं।
आवेदन प्रक्रिया में बड़ा तकनीकी सुधार: एक बार भरें सामान्य विवरण
कॉमन डेटा सुरक्षित रहेगा: पहली बार आवेदन करते समय दी गई सामान्य, व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी पोर्टल पर सुरक्षित रहेगी। छात्र जब किसी अन्य योजना के लिए आवेदन करेगा, तो उसे केवल उस विशेष योजना से जुड़ी जानकारी और संबंधित दस्तावेज ही अपलोड करने होंगे।
त्रुटि सुधार के नियम: यदि आवेदन में कोई विसंगति आती है, तो छात्र केवल संबंधित योजना के डेटा में सुधार कर सकेगा। यदि सामान्य, संस्थान या कोर्स संबंधी विवरण में बदलाव करना है, तो पूर्व में जमा किए गए सभी आवेदन वापस लेने होंगे।
L1 और L2 वेरिफिकेशन प्रक्रिया हुई पारदर्शी व सख्त
L1 लेवल वेरिफिकेशन: संस्थान स्तर पर प्रथम आवेदन के दौरान सत्यापित की गई ट्यूशन फीस, एडमिशन फीस और नॉन-रिफंडेबल फीस का विवरण बाद के अन्य आवेदनों में स्वतः दर्ज हो जाएगा। वेरिफिकेशन अधिकारी को छात्र के सभी आवेदनों का स्टेटस एक ही स्क्रीन पर दिखेगा।
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L2 लेवल वेरिफिकेशन: जिला व राज्य स्तर के नोडल अधिकारियों (L2) को छात्र द्वारा विभिन्न श्रेणियों (मेरिट और वेलफेयर) में किए गए सभी आवेदनों की जानकारी एक साथ प्रदर्शित होगी, जिससे जांच प्रक्रिया में दोहराव खत्म होगा।
रेड फ्लैग सिस्टम: यदि किसी छात्र के सामान्य या शैक्षणिक रिकॉर्ड में कोई गंभीर विसंगति या फर्जीवाड़ा पाया जाता है, तो उसके द्वारा किए गए सभी श्रेणियों के आवेदन सिस्टम में अपने आप ‘रेड फ्लैग’ (Red Flag) श्रेणी में चले जाएंगे।



