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रायपुर: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और स्थानीय रोजगार की स्थिति को लेकर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट ने प्रदेश में पलायन की एक विरोधाभासी तस्वीर पेश की है। जहाँ एक ओर बस्तर और सरगुजा संभाग के अधिकांश जिलों में पलायन पर ‘फुल स्टॉप’ लगता दिख रहा है, वहीं मैदानी इलाकों के कुछ जिले अब भी इस समस्या की गिरफ्त में हैं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य विधानसभा में सामने आया, जहाँ सरकार ने स्वीकार किया कि इस पलायन की निगरानी के लिए कोई विशेष तंत्र मौजूद नहीं है।

जशपुर के लिए राहत भरी खबर: पलायन के ग्राफ में आई बड़ी गिरावट, 3 साल में 40% तक कम हुए आंकड़े

जशपुर की बड़ी कामयाबी: पलायन के ग्राफ में भारी गिरावट

राज्य के जशपुर जिले से एक बेहद सकारात्मक और राहत भरी तस्वीर सामने आई है। विभागीय आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि यहाँ रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले ग्रामीणों की संख्या में साल-दर-साल बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

  • वर्ष 2023-24: प्रभावित ग्रामों की संख्या 439 थी।

  • वर्ष 2024-25: यह आंकड़ा घटकर 312 पर आ गया।

  • वर्ष 2025-26: नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यह संख्या मात्र 276 रह गई है।

  •  मात्र तीन वर्षों के भीतर जशपुर जिले में पलायन प्रभावित ग्रामों की संख्या में लगभग 40% तक की कमी आई है। यह जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर दिए जा रहे रोजगार और कौशल विकास योजनाओं की सफलता का प्रमाण है।

छत्तीसगढ़ के 21 जिलों में पलायन पर ‘फुल स्टॉप’: राजधानी रायपुर समेत बस्तर और सरगुजा संभाग में राहत की तस्वीर

इन 21 जिलों में पलायन ‘शून्य’, रायपुर मॉडल सफल

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के 21 जिलों में पलायन की स्थिति ‘निरंक’ दर्ज की गई है। राजधानी रायपुर में आंकड़ा शून्य होना यह दर्शाता है कि यहाँ औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। इसी तरह, सुदूर वनांचल जिलों जैसे सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में भी पलायन ‘शून्य’ दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में मनरेगा और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती ने ग्रामीणों का बाहर जाना रोका है।

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संभाग शून्य पलायन वाले जिले
रायपुर संभाग रायपुर, धमतरी, गरियाबंद
दुर्ग संभाग बालोद, दुर्ग, मोहला-मानपुर-अ. चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
बस्तर संभाग कोण्डागांव, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर
बिलासपुर संभाग गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, कोरबा
सरगुजा संभाग मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सरगुजा

शून्य पलायन वाले प्रमुख जिले: धमतरी, गरियाबंद, बालोद, दुर्ग, कोंडागांव, कांकेर, सुकमा, बीजापुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मोहला-मानपुर, खैरागढ़, कोरिया, सरगुजा और कोरबा।

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कबीरधाम और बलौदाबाजार: जहाँ समस्या अब भी विकराल

एक तरफ जहाँ कई जिले पलायन मुक्त हो रहे हैं, वहीं कबीरधाम जिला अब भी प्रदेश का सबसे बड़ा पलायन केंद्र बना हुआ है। यहाँ पिछले तीन वर्षों से प्रभावित ग्रामों की संख्या 628 पर स्थिर है। इसी तरह बलौदाबाजार में भी यह आंकड़ा 579 पर अटका हुआ है। सबसे चिंताजनक स्थिति मुंगेली और बिलासपुर की है:

  • मुंगेली: यहाँ पलायन प्रभावित गांव 261 से अचानक बढ़कर 445 हो गए हैं।

  • बिलासपुर: यहाँ भी आंकड़ा 351 से बढ़कर 438 तक पहुँच गया है।

इन जिलों में पलायन का मुख्य कारण आधिकारिक तौर पर ‘रोजगार और जीविकोपार्जन’ ही दर्ज किया गया है।

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विधानसभा में खुलासा: निगरानी के लिए नहीं है कोई ‘सक्षम अधिकारी’

इस पूरी रिपोर्ट के बीच एक गंभीर प्रशासनिक कमी भी उजागर हुई है। विधायक देवेंद्र यादव द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सदन में स्वीकार किया कि प्रदेश में ग्रामीणों के पलायन की देखरेख या सटीक निगरानी के लिए शासन द्वारा कोई विशेष ‘सक्षम अधिकारी’ नियुक्त नहीं किया गया है। वर्ष 2023 से अब तक इस संबंध में किसी विशेष विभाग द्वारा कोई अलग से कार्रवाई तंत्र स्थापित नहीं किया गया है।

एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: छत्तीसगढ़ में पलायन का ‘हॉटस्पॉट’ जिला और किस जिले में है पलायन शून्य 

पलायन के आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण (2023-26)

क्र. जिला 2023-24 (ग्राम) 2024-25 (ग्राम) 2025-26 (ग्राम) स्थिति
1 कबीरधाम 627 628 628 सर्वाधिक पलायन (स्थिर)
2 बलौदाबाजार 579 579 579 स्थिर चिंता
3 मुंगेली 283 261 445 भारी वृद्धि
4 बिलासपुर 351 384 438 निरंतर वृद्धि
5 जांजगीर-चांपा 396 391 416 वृद्धि
6 जशपुर 439 312 276 बड़ा सुधार (40% कमी)
7 बलरामपुर 256 284 288 मामूली वृद्धि
8 बेमेतरा 162 162 162 स्थिर
9 सूरजपुर 127 127 127 स्थिर
10 राजनांदगांव 59 59 59 नियंत्रित
11 रायगढ़ 43 43 43 नियंत्रित
12 महासमुंद 12 12 12 न्यूनतम

 छत्तीसगढ़ में पलायन रोकने के लिए नहीं है कोई ‘विशेष अधिकारी’ 

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