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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्वयं के खर्च पर B.Ed, D.Ed या BTI प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शासकीय शिक्षकों की दो अग्रिम वेतन वृद्धि की मांग को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अपने निजी खर्च पर यह प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को दो अग्रिम वेतन वृद्धि पाने का कोई अधिकार नहीं है।
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यह निर्णय जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ द्वारा रायपुर, गरियाबंद और महासमुंद जिले की शासकीय प्राथमिक शालाओं में पदस्थ प्रधान पाठकों छतेंद्र सिंह ठाकुर, सुधीर सिंह ठाकुर व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है। शिक्षकों ने शासन के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें दो अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ देने से मना किया गया था, साथ ही पूर्व में भुगतान की गई राशि की संभावित वसूली से राहत की मांग भी की थी।
सुनवाई के दौरान शासन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि स्वयं के खर्च पर इस प्रकार के प्रमाणपत्र हासिल करने पर अग्रिम वेतन वृद्धि का दावा ‘नीलम दुबे’ और ‘दिनेश कुमार वर्मा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य’ जैसे पुराने न्यायिक प्रकरणों में पहले ही तय किया जा चुका है। कोर्ट ने शासन की इस दलील को सही मानते हुए अग्रिम वेतन वृद्धि की पात्रता से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया।
अदालत ने रिकवरी के मुद्दे पर स्पष्ट किया कि फिलहाल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई औपचारिक वसूली आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए यह मांग समय से पहले की है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी राहत दी है कि यदि भविष्य में शासन द्वारा कोई वसूली आदेश जारी किया जाता है, तो संबंधित शिक्षक उस आदेश को चुनौती देने के लिए दोबारा हाई कोर्ट आने के लिए स्वतंत्र होंगे।
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