रायपुर: राजधानी रायपुर के संभागायुक्त श्री महादेव कावरे की अध्यक्षता में आज बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण को लेकर संभाग स्तरीय एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025-26 के लिए अपशिष्ट निस्तारण की दरों का पुनर्निर्धारण करना और वर्तमान व्यवस्था में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करना था। बैठक में रायपुर संभाग के सभी पांचों जिलों के कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की मौजूदा व्यवस्था पर गहरा मंथन किया गया। वर्तमान में अस्पतालों से प्रति बेड के आधार पर शुल्क लिया जा रहा है, जिसमें प्रति वर्ष 7.5 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान है। आईएमए के पदाधिकारियों और जिला कलेक्टरों के सुझावों के आधार पर अब इस शुल्क को प्रति बेड के बजाय कचरे के वास्तविक वजन के आधार पर निर्धारित करने पर विचार किया गया है।
संभागायुक्त ने एनओसी प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के निर्देश दिए हैं ताकि अस्पतालों और क्लीनिकों को अनावश्यक प्रशासनिक परेशानियों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, ऐसे छोटे क्लीनिक जहाँ से बायोमेडिकल वेस्ट उत्पन्न नहीं होता, उन्हें इस प्रबंधन व्यवस्था से पृथक करने के विषय पर भी चर्चा हुई।
संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ने सिलतरा स्थित निस्तारण यूनिट के माध्यम से कचरे के नियमित संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक डिस्पोजल को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन स्वास्थ्य संस्थानों का पंजीयन अभी भी लंबित है, उनका शीघ्र पंजीयन सुनिश्चित किया जाए ताकि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। संभागायुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशासन, आईएमए और सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि बायोमेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण और भी अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित हो सके।

