रायपुर: छत्तीसगढ़ में 19 फरवरी से पवित्र माह रमजान का आगाज हो चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने मुस्लिम शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार द्वारा दी गई इस विशेष राहत के तहत, रोजा रखने वाले सभी कर्मचारी रमजान के पूरे महीने के दौरान अपने निर्धारित कार्यालय समय से एक घंटा पहले घर जा सकेंगे।
इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए डॉ. सलीम राज ने इसे प्रदेश सरकार का एक सराहनीय कदम बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सभी जाति, धर्म, पंथ और समाज की आस्था का समान रूप से सम्मान किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह फैसला न केवल सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देगा बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता का भी अनुपम उदाहरण पेश करता है। डॉ. राज ने आगे कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की सोच का ही वास्तविक प्रतिबिंब है। इस छूट से रोजेदारों को इबादत के साथ-साथ अपने परिवार को उचित समय देने में काफी सहूलियत मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि मुस्लिम समाज के लिए रमजान का महीना इबादत, रोजा और आत्म-अनुशासन का विशेष कालखंड माना जाता है। इसे रहमत, बरकत और मगफिरत का महीना भी कहा जाता है, जिसमें मुसलमान दिनभर रोजा रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं और रात में ‘तरावीह’ जैसी विशेष नमाज अदा करते हैं। इस पवित्र माह में कुरान का पाठ किया जाता है और अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है। रोजा न केवल व्यक्ति को धैर्य और आत्म-नियंत्रण सिखाता है, बल्कि दिनभर भूखा-प्यासा रहने से इंसान के भीतर जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता भी पैदा होती है।
रमजान के दौरान ‘जकात’ और ‘सदका’ देने की परंपरा भी समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करती है, जहाँ अपनी आमदनी का एक हिस्सा गरीबों की मदद के लिए दिया जाता है। महीने की आखिरी दस रातें, विशेषकर ‘शब-ए-कद्र’, आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। ऐसे में सरकार का यह निर्णय कर्मचारियों को अपनी धार्मिक जिम्मेदारियों और शासकीय कर्तव्यों के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगा।
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