नई दिल्ली |
भारत सरकार ने सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों और विशेष रूप से 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग पेंशनभोगियों की व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) जमा करने की व्यवस्था को बेहद सुलभ बना दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान बताया कि बायोमेट्रिक प्रणालियों में आने वाली तकनीकी बाधाओं को खत्म करने के लिए सरकार ने अब फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक की शुरुआत की है। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से पेंशनभोगी केवल एक स्मार्टफोन का उपयोग करके अपना जीवन प्रमाण पत्र जनरेट कर सकते हैं।
इस प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वर्ष 2022 से हर साल 1 से 30 नवंबर तक राष्ट्रव्यापी डीएलसी अभियान चलाए जा रहे हैं, जबकि 80 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनभोगियों को अक्टूबर माह में ही अपना प्रमाण पत्र जमा करने की विशेष सुविधा दी गई है। सरकार ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, डाकघरों और ग्रामीण डाक सेवकों की सेवाओं को भी इस अभियान से जोड़ा है ताकि बुजुर्गों को घर-घर जाकर सहायता प्रदान की जा सके।
पेंशन वितरण करने वाले सभी बैंकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे डीएलसी जमा होने की निरंतर निगरानी करें और उन स्थानों पर मेगा कैंप आयोजित करें जहाँ पेंशनभोगियों की संख्या अधिक है। विशेष रूप से बीमार, वृद्ध और दिव्यांग पेंशनभोगियों के लिए घर पर ही सेवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि किसी भी परिस्थिति में उनकी पेंशन प्रक्रिया बाधित न हो।

