**रायपुर।** छत्तीसगढ़ में भले ही अगले विधानसभा चुनाव में अभी करीब ढाई साल का समय बचा है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभी से अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। अप्रैल और मई में देश के पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद, केंद्रीय संगठन के निर्देश पर प्रदेश भाजपा पूरी तरह चुनावी मोड में आ गई है। पार्टी ने राज्य में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए एक बेहद आक्रामक और नई रणनीति तैयार की है, जिसके तहत अब बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक हर महीने अनिवार्य रूप से बैठकें आयोजित की जाएंगी।
### लापरवाही पर सख्त रुख, पहली बार हर माह बैठकों का दौर
भाजपा हमेशा से अपनी अग्रिम चुनावी तैयारियों के लिए जानी जाती है, लेकिन यह पहली बार है जब पार्टी ने चुनाव से ढाई साल पहले ही हर महीने बैठकों का सिलसिला शुरू करने का फैसला किया है। संगठन ने दो टूक कह दिया है कि इन बैठकों को लेकर किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य हर महीने के कार्यक्रमों की समीक्षा करना और जमीनी स्तर पर बूथों को अभेद्य बनाना है।
### नए 3,000 बूथों पर विशेष नजर
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कमजोर बूथों की ‘कुंडली’ तैयार कर उन पर विशेष फोकस किया था, जिसके दम पर पार्टी ने सत्ता में शानदार वापसी की थी। अब परिसीमन और पुनर्गठन (एसआईआर) के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या **25 हजार से बढ़कर करीब 28 हजार** हो गई है। भाजपा का पूरा जोर इन नए बने 3,000 बूथों के साथ-साथ पुराने कमजोर बूथों की पहचान कर उन्हें मजबूत करने पर है। इसके लिए मंडल और जिला स्तर पर बूथवार मंथन किया जाएगा।
### बैठकों का पूरा टाइम-टेबल तय
संगठन को गतिशील रखने के लिए भाजपा ने हर महीने का एक निश्चित कैलेंडर और क्रम तैयार किया है, जो इस प्रकार रहेगा:
पहला सप्ताह: प्रदेश के सभी मंडलों की बैठकें आयोजित की जाएंगी।
दूसरा सप्ताह: जिला स्तर की बैठकें होंगी।
तीसरा सप्ताह: शक्ति केंद्रों की महत्वपूर्ण बैठकें बुलाई जाएंगी।
चौथा सप्ताह:** अंतिम सप्ताह में जमीनी स्तर पर बूथों की बैठक होगी।
बूथ स्तर की बैठकों की शुरुआत से पहले सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को अनिवार्य रूप से सुनेंगे। इसके अलावा, प्रदेश पदाधिकारियों की हर माह बैठक होगी और हर तीन महीने में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होना तय किया गया है।
पन्ना और पेज प्रभारियों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
इस पूरी चुनावी व्यूहरचना में भाजपा के ‘पन्ना’ और ‘पेज प्रभारी’ सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। पार्टी इन जमीनी सिपहसालारों को बड़ी और नई जिम्मेदारियां सौंपने जा रही है, ताकि हर एक वोटर तक सीधे संपर्क साधा जा सके। साफ है कि भाजपा 2028 के रण को फतह करने के लिए कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती और इसकी शुरुआत अगले महीने से होने वाली बैठकों के दौर से हो जाएगी।


