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विशेष संवाददाता | रायपुर
छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों में अपराध की रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान गृह विभाग द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों से यह साफ हुआ है कि रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे प्रमुख शहरी जिले हत्या, लूट और अपहरण के मामलों में राज्य में सबसे आगे हैं। इसके विपरीत, नारायणपुर, सुकमा और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जैसे आदिवासी बहुल और सुदूर जिलों में दर्ज अपराधों की संख्या काफी कम रही है।विधानसभा में पूर्व मंत्री व विधायक उमेश पटेल के सवाल के लिखित जवाब में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने पिछले दो वर्षों (1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 तक) के गंभीर अपराधों का जिलावार ब्यौरा पेश किया।
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अपहरण के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी, रायपुर शीर्ष पर
गृह विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल के भीतर राज्य के लगभग सभी बड़े जिलों में अपहरण के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है:
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रायपुर: सबसे संवेदनशील जिला साबित हुआ है। यहाँ वर्ष 2024-25 में अपहरण के 524 मामले दर्ज थे, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 634 हो गए।
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बिलासपुर: न्यायधानी में भी यह आंकड़ा 331 से उछलकर 438 पर पहुंच गया।
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दुर्ग: यहाँ भी भारी वृद्धि देखी गई, जहाँ मामले 229 से बढ़कर 365 हो गए।
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हत्या और लूट के मामलों में मिला-जुला रुझान
हत्या और लूट की वारदातों में बड़े शहरों में कहीं आंशिक कमी आई है तो कहीं मामूली वृद्धि दर्ज की गई है:राजधानी रायपुर में हत्या के मामलों में मामूली गिरावट (85 से घटकर 84) और बिलासपुर में कमी (59 से घटकर 50) दर्ज की गई है। वहीं, दुर्ग में हत्या के ग्राफ में बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जहाँ मामले 53 से बढ़कर 60 हो गए हैं। रायपुर में लूट की घटनाओं में मामूली कमी (66 से घटकर 64) और दुर्ग में बड़ी राहत (43 से घटकर 27) देखी गई। हालांकि, बिलासपुर में लूट की वारदातें 31 से बढ़कर 34 हो गई हैं।
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पिछले दो वर्षों में राज्य के तीन सबसे बड़े जिलों में दर्ज मुख्य अपराधों की तुलनात्मक स्थिति इस प्रकार है:
| जिला | हत्या (24-25 / 25-26) | लूट (24-25 / 25-26) | अपहरण (24-25 / 25-26) |
| रायपुर | 85 / 84 | 66 / 64 | 524 / 634 |
| बिलासपुर | 59 / 50 | 31 / 34 | 331 / 438 |
| दुर्ग | 53 / 60 | 43 / 27 | 229 / 365 |
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गृह विभाग द्वारा प्रस्तुत 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 तक के सभी 34 जिलों (रेल रायपुर सहित) के तुलनात्मक अपराध आंकड़े नीचे दी गई तालिका में विस्तार से दिए गए हैं।
छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में अपराध का तुलनात्मक विवरण (2024-2026)
| क्र. | जिला | हत्या (24-25 / 25-26) | लूट (24-25 / 25-26) | अपहरण (24-25 / 25-26) | हिरासत में मृत्यु (24-25 / 25-26) |
| 1 | रायपुर | 85 / 84 | 66 / 64 | 524 / 634 | 0 / 0 |
| 2 | बिलासपुर | 59 / 50 | 31 / 34 | 331 / 438 | 0 / 0 |
| 3 | दुर्ग | 53 / 60 | 43 / 27 | 229 / 365 | 0 / 1 |
| 4 | कोरबा | 51 / 46 | 29 / 29 | 224 / 228 | 0 / 0 |
| 5 | बलौदाबाजार | 27 / 40 | 15 / 35 | 202 / 263 | 0 / 0 |
| 6 | जांजगीर-चांपा | 27 / 29 | 17 / 20 | 200 / 217 | 0 / 0 |
| 7 | रायगढ़ | 61 / 53 | 25 / 22 | 111 / 197 | 0 / 0 |
| 8 | सरगुजा | 61 / 52 | 16 / 20 | 130 / 162 | 0 / 0 |
| 9 | महासमुंद | 26 / 25 | 12 / 19 | 121 / 154 | 0 / 0 |
| 10 | जशपुर | 65 / 49 | 7 / 8 | 81 / 114 | 0 / 0 |
| 11 | राजनांदगांव | 25 / 21 | 10 / 13 | 108 / 120 | 0 / 0 |
| 12 | सक्ती | 17 / 14 | 6 / 2 | 122 / 120 | 0 / 0 |
| 13 | कबीरधाम | 27 / 27 | 4 / 4 | 92 / 106 | 0 / 1 |
| 14 | बलरामपुर | 42 / 41 | 6 / 6 | 71 / 90 | 0 / 0 |
| 15 | सूरजपुर | 40 / 38 | 4 / 1 | 63 / 85 | 0 / 0 |
| 16 | बेमेतरा | 30 / 22 | 6 / 9 | 76 / 71 | 0 / 0 |
| 17 | मुंगेली | 14 / 13 | 9 / 6 | 69 / 95 | 0 / 0 |
| 18 | जगदलपुर (बस्तर) | 24 / 25 | 10 / 7 | 73 / 66 | 0 / 0 |
| 19 | सारंगढ़-बिलाईगढ़ | 13 / 16 | 2 / 4 | 75 / 81 | 0 / 0 |
| 20 | बालोद | 25 / 15 | 3 / 9 | 54 / 73 | 0 / 0 |
| 21 | कांकेर | 30 / 19 | 8 / 4 | 58 / 53 | 0 / 0 |
| 22 | गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | 18 / 9 | 0 / 2 | 54 / 65 | 0 / 0 |
| 23 | धमतरी | 24 / 21 | 5 / 8 | 42 / 44 | 1 / 0 |
| 24 | मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर | 13 / 15 | 2 / 1 | 46 / 62 | 0 / 0 |
| 25 | कोरिया | 12 / 21 | 3 / 4 | 45 / 55 | 0 / 0 |
| 26 | कोण्डागांव | 13 / 13 | 0 / 0 | 42 / 54 | 0 / 0 |
| 27 | बीजापुर | 49 / 33 | 0 / 0 | 22 / 12 | 0 / 1 |
| 28 | गरियाबंद | 18 / 13 | 4 / 6 | 31 / 42 | 0 / 0 |
| 29 | खैरागढ़-छुईखदान-गंडई | 12 / 12 | 7 / 1 | 28 / 41 | 0 / 0 |
| 30 | सुकमा | 33 / 16 | 1 / 0 | 17 / 17 | 0 / 0 |
| 31 | दंतेवाड़ा | 15 / 18 | 2 / 0 | 12 / 26 | 0 / 0 |
| 32 | मोहला-मानपुर-अ.चौकी | 10 / 7 | 0 / 0 | 19 / 27 | 0 / 0 |
| 33 | नारायणपुर | 15 / 9 | 0 / 0 | 11 / 8 | 0 / 0 |
| 34 | रेल रायपुर | 11 / 4 | 7 / 5 | 60 / 0 | 0 / 0 |
प्रदेश के बड़े और घने आबादी वाले शहरी जिलों (रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और बलौदाबाजार) में अपहरण के आंकड़ों में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई है। नारायणपुर, सुकमा, कोण्डागांव और मोहला-मानपुर जैसे नक्सल प्रभावित व आदिवासी बहुल जिलों में लूट और फिरौती के लिए अपहरण के मामले राज्य में सबसे कम दर्ज किए गए हैं।
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हिरासत में मौत के मामलों में आई कमी, जेलों में मौत के आंकड़े चौंकाने वाले
राहत की बात यह है कि पुलिस कस्टडी (हिरासत) में मौत के मामले लगभग सभी जिलों में शून्य के करीब हैं। हालांकि, पिछले दो वर्षों में कोरबा, सूरजपुर, धमतरी और बीजापुर जिलों में हिरासत में मौत का 1-1 मामला दर्ज किया गया है।
वहीं, जेल में कैदियों की मृत्यु के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजधानी रायपुर की सेंट्रल जेल सबसे आगे है, जहाँ पिछले दो वर्षों में 81 कैदियों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद बिलासपुर जेल में 17 और दुर्ग जेल में 5 कैदियों की मौत की जानकारी दी गई है।
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पुलिस बल और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की कार्रवाई
“अपराधों पर लगाम कसने के लिए हमारी सरकार पूरी संजीदगी से काम कर रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में बीट व्यवस्था, सघन पेट्रोलिंग और सतत निगरानी बढ़ाई गई है। इसके साथ ही, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘हेलो सिस्टर’ अभियान और ‘अभिव्यक्ति’ मोबाइल ऐप के जरिए व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।”
— विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री, छत्तीसगढ़
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बस्तर और आदिवासी बहुल जिलों में अपराध काफी कम
शहरी इलाकों की तुलना में सुकमा, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जैसे जिलों में हत्या, लूट और अपहरण के मामले बेहद कम दर्ज हुए हैं। सुकमा में पिछले एक वर्ष में हत्या के 16 और लूट का केवल 1 मामला आया है, जबकि नारायणपुर में लूट और अपहरण की संख्या शून्य के करीब है। विशेषज्ञ इसका मुख्य कारण वहां की सामुदायिक जीवन शैली और पुलिस की सघन मौजूदगी को मानते हैं।



