भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ जल संसाधनों के मामले में देश के संतुलित राज्यों की श्रेणी में बना हुआ है। जहाँ देश के कई राज्य भूजल के अति-दोहन (Over-exploitation) की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक जल संपदा और बेहतर प्रबंधन के कारण एक आदर्श स्थिति में है। “भारत के जल संसाधनों का आकलन-2024” की रिपोर्ट बताती है कि छत्तीसगढ़ का मुख्य आधार कही जाने वाली महानदी की औसत वार्षिक जल उपलब्धता 72.82 अरब घन मीटर (BCM) है, जो राज्य की कृषि और औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए एक मजबूत स्तंभ है।
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भूजल के मोर्चे पर वर्ष 2025 के ताजा आंकड़े राहत देने वाले हैं। राज्य में वार्षिक भूजल पुनर्भरण (Recharge) 14.30 BCM आंका गया है, जबकि इसके मुकाबले वार्षिक निष्कर्षण योग्य भूजल संसाधन 13.07 BCM है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छत्तीसगढ़ वर्तमान में सभी उपयोगों के लिए केवल 6.30 BCM भूजल का ही उपयोग कर रहा है। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि राज्य अपने उपलब्ध भूजल का लगभग आधा हिस्सा ही इस्तेमाल कर रहा है, जो इसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार बनाता है।
केंद्र और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा रहा है। ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ और ‘हर खेत को पानी’ जैसी योजनाओं के तहत राज्य के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की हजारों संरचनाएं खड़ी की गई हैं। इसके साथ ही, महानदी और गोदावरी बेसिन के जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार किया जा रहा है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण और उद्योगों की मांग को देखते हुए छत्तीसगढ़ को अभी से सतर्क रहने की आवश्यकता है। राज्य सरकार वर्तमान में जल निकायों के मरम्मत, नवीकरण और पुनरुद्धार (RRR) पर विशेष ध्यान दे रही है, ताकि पारंपरिक तालाबों और जलाशयों की संग्रहण क्षमता को बढ़ाया जा सके। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ की जल स्थिति वर्तमान में न केवल संतोषजनक है, बल्कि सतत विकास की दिशा में एक बड़ी ताकत बनकर उभर रही है।

