बजट 2026: विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप; हर जिले में बेटियों को हॉस्टल, 7 लाख बुनकरों को संबल और पर्यटन से खुलेगा रोजगार का नया आसमान
तेंदूपत्ता और खनिज पर TCS कटौती: ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आएगी तेजी
बजट में तेंदूपत्ता पर टीसीएस (TCS) को 5% से घटाकर 2% किया गया है। छत्तीसगढ़ के लिए यह सबसे बड़ा फैसला है क्योंकि:
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संग्राहकों को लाभ: जब टैक्स का बोझ कम होता है, तो व्यापारियों की लागत घटती है, जिसका सीधा फायदा संग्रहण करने वाले आदिवासियों को ‘नकद भुगतान’ या ‘बोनस’ के रूप में मिलता है।
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खनिज क्षेत्र: छत्तीसगढ़ एक माइनिंग हब है। खनिजों पर टैक्स दरों के युक्तिकरण से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और छोटे खनिज पट्टाधारकों (Miners) को व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business) होगी।
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2. हर जिले में कन्या छात्रावास: शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति
प्रत्येक जिले में लड़कियों के लिए छात्रावास (Hostel) निर्माण की योजना छत्तीसगढ़ के लिए गेम-चेंजर साबित होगी:
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दूरी की समस्या का हल: छत्तीसगढ़ के कई वनांचल क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के केंद्र दूर हैं। हॉस्टल की सुविधा मिलने से छात्राओं को शहरों में रहने का सुरक्षित स्थान मिलेगा।
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STEM पर जोर: यह छात्रावास विशेष रूप से उन छात्राओं की मदद करेंगे जो विज्ञान, तकनीक और मेडिकल की पढ़ाई करना चाहती हैं, जिससे राज्य की बेटियां तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ सकेंगी।
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3. हथकरघा और कोसा उद्योग: 7 लाख परिवारों का भविष्य
छत्तीसगढ़ का कोसा रेशम विश्व प्रसिद्ध है। बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान हैं:
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तकनीकी अपग्रेड: ‘समर्थ 2.0’ और ‘वस्त्र विस्तार योजना’ के माध्यम से बुनकरों को पुरानी मशीनों की जगह नई और आधुनिक मशीनें दी जाएंगी।
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मार्केटिंग सपोर्ट: राष्ट्रीय हथकरघा कार्यक्रम के तहत राज्य के बुनकरों के उत्पादों को ‘ब्रांडिंग’ मिलेगी, जिससे वे अपने कपड़े सीधे वैश्विक बाजारों में बेच सकेंगे और बिचौलियों का असर कम होगा।
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4. एवीजीसी (AVGC) और एआई लैब: युवाओं को मिलेगा डिजिटल कौशल
छत्तीसगढ़ के युवाओं को अब केवल पारंपरिक नौकरियों पर निर्भर नहीं रहना होगा:
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डिजिटल करियर: एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स और गेमिंग (AVGC) की लैब खुलने से रायपुर, भिलाई और बिलासपुर जैसे शहरों के युवा घर बैठे वैश्विक प्रोजेक्ट्स पर काम कर सकेंगे।
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कृषि में एआई: ‘भारत-विस्तार’ एआई टूल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के किसान अपनी स्थानीय भाषा में (जैसे छत्तीसगढ़ी या हल्बी) मौसम और फसलों की सटीक जानकारी पा सकेंगे, जिससे खेती का जोखिम कम होगा।
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5. पर्यटन गाइड प्रशिक्षण: बस्तर-सरगुजा में रोजगार के अवसर
छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिसे अब प्रोफेशनल टच मिलेगा:
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कौशल विकास: IIM की मदद से होने वाला 12 सप्ताह का प्रशिक्षण स्थानीय युवाओं को ‘हाई-प्रोफाइल गाइड’ बनाएगा।
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स्थानीय रोजगार: बस्तर के चित्रकोट या तीरथगढ़ जैसे क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को अब रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा; वे अपने ही क्षेत्र के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट कर सकेंगे।
यह बजट छत्तीसगढ़ के ‘जल-जंगल-जमीन’ और ‘जेन-जी (Gen-Z) युवा’ के बीच एक बेहतरीन संतुलन बनाता है। जहाँ एक तरफ तेंदूपत्ता जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को टैक्स से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर हॉस्टल और एआई लैब के जरिए भविष्य की पीढ़ी को तैयार करने का रोडमैप तैयार किया गया है।

