बजट 2026: 1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर अधिनियम; बायबैक पर टैक्स बढ़ा

रायपुर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026-27 में जहाँ एक ओर कुछ घोषणाएं की गईं, वहीं छत्तीसगढ़ की कई बुनियादी और लंबे समय से लंबित मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। राज्य की वित्तीय स्थिति और भौगोलिक चुनौतियों के लिहाज से इस बजट में कई ‘खाली स्थान’ नजर आ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ की अपेक्षाओं के विपरीत क्या ‘नहीं’ मिला?

1. रेल नेटवर्क के विस्तार पर कोई ठोस घोषणा नहीं:

छत्तीसगढ़ लंबे समय से नए रेल रूटों और यात्री सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रहा है। बजट में ‘हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर’ की बात तो हुई, लेकिन उसमें छत्तीसगढ़ का एक भी शहर (जैसे रायपुर या बिलासपुर) शामिल नहीं है। राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए किसी नई रेल लाइन की घोषणा न होना निराशाजनक है।

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2. जीएसटी (GST) मुआवजे की भरपाई पर चुप्पी:

एक उत्पादक राज्य होने के नाते छत्तीसगढ़ को जीएसटी लागू होने के बाद राजस्व का भारी नुकसान हुआ है। राज्य सरकार लगातार केंद्र से मुआवजे (Compensation) की अवधि बढ़ाने या उसकी भरपाई के लिए विशेष फंड की मांग करती रही है, लेकिन बजट में इस वित्तीय संकट का कोई समाधान नहीं दिखा।

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3. धान के ‘बोनस’ या MSP पर अतिरिक्त सहायता का अभाव:

छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। किसानों को उम्मीद थी कि धान की खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए केंद्र सरकार एमएसपी (MSP) के अलावा किसी विशेष प्रोत्साहन राशि या खाद सब्सिडी में बड़ी राहत का ऐलान करेगी, लेकिन कृषि क्षेत्र के लिए की गई घोषणाएं ‘एआई पोर्टल’ और तकनीक तक ही सीमित रहीं।

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4. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज की कमी:

बस्तर और सरगुजा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, सड़कों और सुरक्षा बलों के कैंपों के विकास के लिए राज्य एक विशेष आर्थिक पैकेज की उम्मीद कर रहा था। बजट में ‘पूर्वोदय’ योजना के तहत पड़ोसी राज्यों की चर्चा तो है, लेकिन छत्तीसगढ़ के इन संघर्षपूर्ण क्षेत्रों के लिए कोई अलग वित्तीय प्रावधान नहीं दिखा।

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5. स्टील और सीमेंट उद्योगों को नहीं मिली ‘विशेष’ राहत:

छत्तीसगढ़ भारत का बड़ा स्टील और सीमेंट उत्पादक है। उद्योगों को उम्मीद थी कि कोयले की रॉयल्टी या माल ढुलाई (Freight) दरों में कुछ कटौती होगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिले, लेकिन इस मोर्चे पर उद्योगपतियों के हाथ खाली रहे।

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 ‘डिजिटल’ तो है बजट, पर ‘बुनियादी’ जरूरतों पर मौन

भले ही बजट में तेंदूपत्ता पर टैक्स घटाकर छोटी राहत दी गई हो, लेकिन छत्तीसगढ़ की बड़ी वित्तीय जरूरतें और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी मांगें अधूरी रह गई हैं। बजट में एआई (AI) और हाई-टेक लैब की बात तो है, लेकिन राज्य के उन सुदूर इलाकों के लिए क्या, जहाँ आज भी बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं संघर्ष का विषय हैं?

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