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रायपुर: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक शुद्ध और नियमित पेयजल पहुंचाने के दावे सरकारी फाइलों में चाहे जितने भी मजबूत दिखते हों, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी चिंताजनक बनी हुई है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश की गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि राज्य के ग्रामीण परिवार आज भी योजना निर्माण की कमियों के कारण बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एक भी जिला नहीं छू सका शत-प्रतिशत का आंकड़ा
आम जनता के लिए सबसे निराशाजनक बात यह है कि मार्च 2024 तक राज्य का कोई भी 33 जिला या 146 विकासखंड अपने सभी ग्रामीण परिवारों को 100% क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल नहीं कर सका है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 जिलों में जरूर कवरेज 76 से 98 प्रतिशत के बीच रही, जिसमें धमतरी 98 प्रतिशत के साथ सबसे आगे और बलौदाबाजार 76 प्रतिशत पर रहा। लेकिन शेष 15 जिलों में तो स्थिति और भी खराब दर्ज की गई, जहां कवरेज महज 56 से 74 प्रतिशत के बीच सिमट कर रह गई। इसका सीधा मतलब यह है कि आज भी राज्य की एक बड़ी ग्रामीण आबादी इस बुनियादी सुविधा से वंचित है।
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जनता की भागीदारी को किया गया दरकिनार
सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को प्रमुखता से उठाया है कि इस मिशन में सबसे बड़ी गलती ‘नीचे से ऊपर की ओर’ (बॉटम-अप प्लानिंग) योजना बनाने की प्रक्रिया का पालन न करना रही। ग्रामीण इलाकों में जल सुरक्षा योजनाएं और ग्राम कार्ययोजनाएं तैयार किए बिना ही सीधे जिला स्तर पर कागजी योजनाएं बना दी गईं। इसके अलावा, सहायता करने वाली एजेंसियों (इम्प्लीमेंटिंग सपोर्ट एजेंसी) की नियुक्ति भी तब की गई जब योजनाएं पहले ही बन चुकी थीं। इस वजह से स्थानीय ग्रामीणों और समुदाय की इस मिशन में कोई भागीदारी ही नहीं रही, जिससे पेयजल सुरक्षा की यह महत्वाकांक्षी योजना बेहद कमजोर पड़ गई।
मिशन के शुरुआती दो वर्षों में हुई भारी लेत-लतीफी के कारण छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र और राज्य के कोटे से मिलने वाली 6,480.04 करोड़ रुपये की बड़ी राशि भी समय पर नहीं जुटा सकी। कुल 11,034.26 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी छत्तीसगढ़ आज देश में 23वें स्थान पर खड़ा है। अब रिपोर्ट में यह सिफारिश की गई है कि अगर सच में हर ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और सतत पेयजल पहुंचाना है, तो कागजी व्यवस्था को छोड़कर ग्रामीण स्तर पर जल स्रोतों की स्थिरता और दीर्घकालिक निगरानी को तुरंत सुदृढ़ करना होगा।
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