बसंत पंचमी का पावन पर्व देश भर में श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। ज्ञान, विद्या और वाणी की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना के साथ शैक्षणिक परिसरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं मंदिरों में श्रद्धालुओं ने माँ शारदे से ज्ञान और सद्बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में प्रातःकाल से ही पूजा अर्चना का क्रम प्रारंभ हुआ। विधि विधान से माँ सरस्वती की प्रतिमा एवं चित्र की स्थापना कर शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से पूजा की। विद्यालय परिसरों में वैदिक मंत्रोच्चार, दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण के साथ वातावरण भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर वीणा वादिनी माँ सरस्वती की स्तुति और वंदना प्रस्तुत की गई। स्कूली बच्चों ने सरस्वती वंदना, गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से ज्ञान, संस्कृति और भारतीय परंपरा को जीवंत किया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और विद्यालय परिसर उत्सव स्थल में परिवर्तित हो गया।
शिक्षकों ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और सृजनशीलता को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी केवल एक पर्व नहीं बल्कि ज्ञान के प्रति समर्पण और निरंतर अध्ययन का संकल्प लेने का दिन है।
वहीं शहर और आसपास के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलेगी। भक्तों ने माँ सरस्वती की पूजा कर अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, विद्या और विवेक की कामना की। मंदिरों में घंटा घड़ियाल और भजनों के साथ आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
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बसंत पंचमी के इस पावन अवसर पर पूरा क्षेत्र ज्ञान, संस्कृति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया, जहां बच्चों की मुस्कान, श्रद्धालुओं की आस्था और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने पर्व को विशेष बना दिया।

