छत्तीसगढ़ में जमीन डायवर्सन प्रक्रिया हुई ऑनलाइन, साय सरकार का बड़ा फैसला
रायपुर 13 दिसंबर 2025
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भूमि मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया है। वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में पेरी अर्बन ग्रामों सहित सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू वर्ग मीटर दर को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब ग्रामीण एवं अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में भूमि का मूल्यांकन केवल हेक्टेयर दर के आधार पर किया जाएगा, जिससे आम नागरिकों, किसानों और भू धारकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
पूर्व व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों में 500 वर्ग मीटर तक की भूमि का मूल्यांकन वर्ग मीटर दर से तथा उससे अधिक भूमि का मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जाता था। वर्ग मीटर दर अधिक होने के कारण छोटे भूखंडों पर अत्यधिक मूल्य और शुल्क लग जाता था जबकि बड़े भूखंडों का मूल्य अपेक्षाकृत कम रहता था। इस विसंगति को समाप्त करते हुए सरकार ने अब सभी ग्रामीण भूमि के लिए एक समान हेक्टेयर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था लागू कर दी है।
नई व्यवस्था से भूमि अधिग्रहण मामलों में वास्तविक क्षेत्रफल के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित होगा। उदाहरण के तौर पर बालोद जिले के ग्राम देवारभाट में पूर्व व्यवस्था के तहत 500 वर्ग मीटर भूमि का मूल्यांकन अधिक और 1000 वर्ग मीटर भूमि का मूल्यांकन अपेक्षाकृत कम किया जाता था। नई प्रणाली लागू होने के बाद दोनों ही मामलों में मूल्यांकन तर्कसंगत और संतुलित हो गया है, जिससे छोटे भू धारकों को भी समान न्याय मिल रहा है।
वर्ग मीटर दर समाप्त होने का सीधा असर स्टाम्प और पंजीयन शुल्क पर भी पड़ा है। भूमि का बाजार मूल्य अब वास्तविक और किफायती दरों पर निर्धारित होने से रजिस्ट्री की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे ग्रामीण और पेरी अर्बन क्षेत्रों में भूमि खरीदना आम नागरिकों के लिए पहले से अधिक आसान हो गया है।
उप पंजीयक कार्यालय बालोद में हाल ही में पंजीकृत दस्तावेजों से यह स्पष्ट हुआ है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क में हजारों रुपये की सीधी बचत हो रही है। इससे किसानों, भू धारकों और आम खरीदारों को अनावश्यक अतिरिक्त खर्च से राहत मिली है।
राज्य सरकार का यह निर्णय ग्रामीण और अर्द्ध शहरी जनता के हित में दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है। भूमि लागत कम होने से रियल एस्टेट, आवास निर्माण और विकास कार्यों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का उद्देश्य भूमि और आवास से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ, किफायती और पारदर्शी बनाना है और यह फैसला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

