भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए ‘कड़ा कानून’ लाएगी साय सरकार
CG NOW
छत्तीसगढ़ के बस्तर से लेकर सरगुजा तक मौसम के बदले मिजाज ने भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत दी है। राजनांदगांव में पारा 40.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा था, लेकिन देर रात आए सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती प्रसार ने स्थिति पूरी तरह बदल दी। तेज आंधी और गरज-चमक के साथ हुई इस बारिश ने न केवल तापमान में गिरावट दर्ज की, बल्कि वनांचल क्षेत्रों के लिए यह किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई।
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इस समय छत्तीसगढ़ के जंगलों में महुआ संग्रहण का सीजन अपने चरम पर है। ग्रामीण इलाकों में ग्रामीण देर रात और तड़के महुआ बीनने के काम में जुटे हैं। अचानक हुई इस बारिश और तेज हवाओं ने महुआ के फूलों को पेड़ों से झड़ा दिया है, जिससे संग्राहकों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है। हालांकि, 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने कुछ जगहों पर चुनौतियां भी पेश कीं, लेकिन महुआ की अच्छी पैदावार की उम्मीद ने ग्रामीणों का उत्साह बढ़ा दिया है।
सबसे सुखद पहलू प्रदेश के जंगलों से सामने आया है। बढ़ती गर्मी के कारण छत्तीसगढ़ के कई वन क्षेत्रों में भीषण आग लगी हुई थी, जिसे बुझाने के लिए वन विभाग लगातार संघर्ष कर रहा था। प्रकृति ने खुद हस्तक्षेप करते हुए इस आंधी और बारिश के जरिए जंगलों की आग को शांत कर दिया है। इससे बेशकीमती वन संपदा और वन्यजीवों को सुरक्षित जीवनदान मिला है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक छत्तीसगढ़ समेत पड़ोसी राज्यों ओडिशा, झारखंड और तेलंगाना में भी इसी तरह के उतार-चढ़ाव भरे मौसम की चेतावनी जारी की है।

