रायपुर | 20 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ की षष्ठम् विधानसभा के लिए वर्ष 2025 विधायी कामकाज की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और सक्रिय रहा है। राज्य सरकार ने इस एक वर्ष के भीतर विभिन्न सत्रों के माध्यम से कुल 31 विधयेकों को सदन की स्वीकृति दिलाई, जो प्रदेश की सुरक्षा, सुशासन और आर्थिक स्थिरता की दिशा में बड़े कदम माने जा रहे हैं। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार ने इस दौरान 5 नए मूल विधेयक, 3 विनियोग विधेयक और 23 महत्वपूर्ण संशोधन विधयेकों को पारित कर कानून का रूप दिया है।
वर्ष की शुरुआत में फरवरी-मार्च के बजट सत्र के दौरान विधायी कार्यों की नींव रखी गई, जिसमें कुल 14 विधेयक पारित हुए। इस सत्र का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल विधेयक’ रहा, जिसे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों और सार्वजनिक उपक्रमों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लाया गया। इसके साथ ही, लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक और पंचायत राज (संशोधन) विधेयक जैसे कानूनों के जरिए प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों पर जोर दिया गया।
जुलाई के मानसून सत्र में सरकार ने वित्तीय और ढांचागत सुधारों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। इस सत्र में पारित ‘छत्तीसगढ़ पेंशन निधि विधेयक, 2025’ कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ। इसके अलावा, राज्य की आर्थिक मजबूती के लिए ‘ग्रोथ एवं स्टेबिलिटी फंड विधेयक’ और नियोजित शहरी विकास के लिए ‘राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण विधेयक’ जैसे दूरगामी परिणाम वाले कानून बनाए गए। इसी सत्र में कृषि उपज मंडी और भू-राजस्व संहिता में भी आवश्यक संशोधन किए गए ताकि किसानों और आम जनता को सरल प्रक्रिया का लाभ मिल सके।
वर्ष के अंत में नवम्बर-दिसंबर के शीतकालीन सत्र के दौरान व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए ‘छत्तीसगढ़ जन विश्वास विधेयक’ पारित किया गया। इस कानून का उद्देश्य छोटे व्यापारिक अपराधों के प्रावधानों में सुधार कर उद्योगों को राहत पहुँचाना है। इसके अतिरिक्त, निजी विश्वविद्यालयों के संचालन और श्रम कानूनों में संशोधन के जरिए शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए गए। कुल मिलाकर, वर्ष 2025 के ये 31 विधेयक छत्तीसगढ़ को एक आधुनिक और सुरक्षित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाते हैं।
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