रायपुर | 20 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ की षष्ठम् विधानसभा के अष्टम् सत्र (बजट सत्र) का आज अनिश्चितकाल के लिए समापन हो गया। 23 फरवरी 2026 से शुरू हुआ यह सत्र राज्य के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित ‘नवीन विधानसभा भवन’ में आयोजित होने वाला पहला बजट सत्र था। सत्र के समापन पर सदन की उपलब्धियों और कामकाज के जो सांख्यिकीय आंकड़े सामने आए हैं, वे राज्य की जीवंत संसदीय लोकतांत्रिक परंपरा को दर्शाते हैं।
अब 35,000 फीट की ऊंचाई पर भी मिलेगी ताजगी: आयुष मंत्रालय ने लॉन्च किया 5 मिनट का ‘इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल’
कामकाज का लेखा-जोखा: चर्चा और भागीदारी
इस बजट सत्र की कुल अवधि 26 दिनों की रही, जिसमें कुल 15 बैठकें आयोजित की गईं। सदन की कार्यवाही के दौरान सदस्यों ने गहरी रुचि दिखाते हुए लगभग 108 घंटे तक विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की। वित्त वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक (बजट) पर सामान्य चर्चा 09 घंटे 58 मिनट तक चली, जबकि विभागों की अनुदान मांगों पर 47 घंटे 04 मिनट की विस्तृत चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, विनियोग विधेयक पर भी सदस्यों ने 06 घंटे 49 मिनट तक अपने विचार साझा किए।
जनऔषधि केंद्रों पर 80% तक सस्ती मिलेंगी दवाएं, सरकार ने कड़े किए मूल्य नियंत्रण के नियम
विधायी उपलब्धियां: सभी 8 विधेयक हुए पारित
सदन में विधायी कार्यों के निष्पादन में शत-प्रतिशत सफलता देखी गई। इस सत्र के दौरान कुल 08 विधेयक प्रस्तुत किए गए और गहन चर्चा के उपरांत सभी 08 विधेयकों को पारित कर दिया गया। इनमें सबसे प्रमुख ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’ रहा, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं। इसके साथ ही ‘छत्तीसगढ़ नगर ग्राम निवेश विधेयक-2026’ और ‘छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक-2026’ जैसे महत्वपूर्ण कानूनों पर भी सदन की मुहर लगी।
शिक्षा मंत्रालय का ‘मिशन 2030’: अब ‘NIOS मित्र’ लाएंगे स्कूल छोड़ चुके 2 करोड़ बच्चों को मुख्यधारा में
संसदीय शुचिता और जवाबदेही के आंकड़े
जनता के प्रति जवाबदेही तय करने वाले प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण सूचनाओं में भी भारी सक्रियता देखी गई। सत्र के दौरान कुल 2924 प्रश्न (तारांकित और अतारांकित) प्राप्त हुए, जिनमें से 86 महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर सदन में मौखिक रूप से दिए गए। वहीं, ध्यानाकर्षण के तहत कुल 603 सूचनाएं शासन को प्राप्त हुईं, जिनमें से 220 सूचनाओं को चर्चा के लिए ग्राह्य (स्वीकार) किया गया।
नवीन भवन में आयोजित यह प्रथम सत्र न केवल बुनियादी ढांचे की भव्यता के लिए याद किया जाएगा, बल्कि इसमें हुई उच्च स्तरीय संसदीय चर्चाओं और विधायी निर्णयों ने छत्तीसगढ़ के विकास के मार्ग को और अधिक प्रशस्त किया है।

