**रायपुर, 09 अप्रैल 2026** छत्तीसगढ़ ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए देश के शीर्ष राज्यों में अपनी जगह बना ली है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य ने आधुनिक तकनीक और सुदृढ़ प्रबंधन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान की है। ई-केवायसी, जियो-टैगिंग और क्यूआर कोड जैसे नवाचारों ने न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, बल्कि भुगतान प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और सुगम बनाया है।
राज्य सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 तक प्रदेश ने अपने 97 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। अब तक लगभग 58.16 लाख श्रमिकों का ई-केवायसी डेटा अपडेट किया जा चुका है, जिससे सीधे बैंक खातों में होने वाले भुगतान की सटीकता सुनिश्चित हुई है। इसके साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में निर्मित 11.32 लाख परिसंपत्तियों की जियो-टैगिंग का कार्य भी पूरा हो चुका है, जिससे अब कार्यों की वास्तविक स्थिति की मॉनिटरिंग कहीं से भी संभव हो गई है।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए राज्य ने वैज्ञानिक पद्धति को भी प्राथमिकता दी है। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘युक्तधारा पोर्टल’ के माध्यम से 11,668 ग्राम पंचायतों में करीब 2,86,975 कार्यों की जीआईएस आधारित कार्ययोजना तैयार की गई है। कार्यस्थलों पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए अब फेस ऑथेंटिकेशन आधारित एनएमएमएस प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उपस्थिति की निगरानी अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनी है।
कुदरत की ‘जादुई’ हेर-फेर: अप्रैल में घुसा नवंबर, सिस्टम हुआ हैंग; पसीने की जगह छूट रही है कंपकंपी
आम नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड की व्यवस्था शुरू की गई है। इस तकनीक के प्रति ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और एक सितंबर से अब तक लगभग 5 लाख से अधिक बार इन कोड्स को स्कैन कर कार्यों की जानकारी ली गई है। इसके अलावा, राज्य सरकार प्रत्येक माह की 7 तारीख को ‘चावल उत्सव’ के साथ ‘रोजगार दिवस’ और ‘आवास दिवस’ का आयोजन कर रही है, जहाँ ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ का यह मॉडल अब देशभर में ग्रामीण विकास और सुशासन के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभर रहा है।

