Day Care- आज-कल के भाग दौड़ भरी जिंदगी में और बढ़ती महंगाई की वजह से माता-पिता दोनों काम करते हैं. ऐसे में बच्चे की जिम्मेदारी को निभाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है. लेकिन आपके बच्चे का ख्याल रखने के लिए बाजार में कई सुविधाए हैं, जहां आप अपने बच्चों को रख सकती हैं और सही देखभाल भी हो जाएगा और पढ़ाई भी हो जाएगी. आपने डे-केयर का नाम तो सुना ही होगा, छोटे बच्चों के लिए यहां हर सुविधाएं होती हैं, कई कॉर्पोरेट ऑफिसेस में भी बच्चों के लिए डे-केयर की सुविधा होती है.

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लेकिन डे-केयर खोलने के लिए एक लंबी प्रोसेस से गुजरना पड़ता है. साथ ही पैरेंट्स भी अगर अपने बच्चे को पढ़ने के लिए भेज रहे हैं तो सावधानी बरतें. हाल ही में Noida में स्थित एक डे-केयर में एक 15 महीने की बच्ची के साथ मेड में मार-पीट की, जिसके बाद पैरेंट्स का गुस्सा फूटा है. ऐसे में पैरेंट्स को ध्यान रखने की सख्त जरूरत है.

डे केयर खोलने के लिए क्या करना होता है?

प्लान करना है जरूरी: सबसे पहले, यह तय करें कि आप किस तरह का डे केयर सेंटर (Day Care Center) खोलना चाहते हैं (जैसे, घर से या एक अलग जगह पर). अपने आस-पास पता लगाए कि किसकी ज्यादा डिमांड है, उसके हिसाब से फिर डे-केयर खोले. इसके बाद अपने चीज का एक प्लान बनाएं, जैसे कितनी फीस होगी, क्या-क्या सुविधाएं होगी.

लाइसेंस और कानूनी प्रक्रिया:  डे केयर खोलने के लिए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन करनी होती है.  आपको अपने स्थानीय नगर निगम से ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ सकता है. कर्मचारियों के पुलिस वेरिफिकेशन और फर्स्ट एड व सीपीआर की ट्रेनिंग जैसे सर्टिफिकेशन भी ज़रूरी होते हैं. वहीं कुछ राज्यों में डे केयर को नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीकृत कराना भी अनिवार्य होता है.

सही जगह का करें चुनाव: डे केयर खोलने के लिए बच्चों की सुरक्षा का खास ध्यान रखें,  जगह में पर्याप्त रोशनी, हवादार कमरे, सुरक्षित खेलने की जगह और बच्चों के लिए अनुकूल शौचालय होने चाहिए.

स्टाफ की भर्ती: डे केयर में अनुभवी और योग्य स्टाफ का होना बहुत ज़रूरी है. स्टाफ को बच्चों की देखभाल, फर्स्ट एड और आपातकालीन स्थितियों को संभालने आना चाहिए. कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर कराएं.

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पैरेंट्स को ये सावधानी बरतनी चाहिए

  •  सबसे पहले, डे केयर की सिक्योरिटी और साफ-सफाई की चेक करें, वहां के खिलौने, फर्श, और शौचालय स्वच्छ हैं और जगह पूरी तरह सुरक्षित हो.
  • डे केयर के स्टाफ से मिलें और उनके अनुभव और व्यवहार को देखें, उनका दूसरों के बच्चो के साथ कैसा व्यवहार है. बच्चों के लिए एक सॉफ्ट शांत स्टाफ होना चाहिए.
  • इस बात का भी ध्यान रखें कि कहीं बच्चे ज्यादा और स्टाफ कम तो नहीं है, क्योंकि फिर हर बच्चे पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है.
  • ऐसे डे केयर को प्राथमिकता दें जहां सीसीटीवी कैमरे लगे हों और माता-पिता को अपने बच्चे की गतिविधियों को लाइव देख सके.
  • डे-केयर में बच्चों को क्या-क्या खिलाया जाता है, पढ़ाई-लिखाई कैसे करवाते हैं और खेलने-कूदने के लिए क्या-क्या सुविधा है.
  • डे केयर जाने के बाद अपने बच्चे के व्यवहार पर नजर रखें, अगर वह उदास या चिड़चिड़ा रहता है, तो यह डे केयर में किसी समस्या का संकेत हो सकता है.
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