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बलरामपुर:
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी की गई परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पी.जी.आई. 2.0) 2025-26 की जिलावार रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक मानचित्र पर प्रदेश के विभिन्न जिलों की स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस महत्वपूर्ण मूल्यांकन में बलरामपुर जिले ने शैक्षणिक प्रबंधन और प्रदर्शन के मानकों पर खरा उतरते हुए 600 में से 308 अंक प्राप्त किए हैं। इस उपलब्धि पर जिले के डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) श्री मनी राम यादव ने प्रसन्नता व्यक्त की है और इस सफलता के लिए जिले के सभी शिक्षकों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनायें दी हैं। इस प्रदर्शन के साथ ही बलरामपुर ने प्रदेश के उच्च प्रदर्शन करने वाले उन 18 जिलों में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है, जिन्हें ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार, राज्य भर में शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है। जहाँ एक ओर रायगढ़ जिला 329 अंकों के साथ प्रदेश में शीर्ष स्थान पर काबिज है, वहीं सरगुजा (324 अंक) और बीजापुर (323 अंक) ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया है। प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति पर नजर डालें तो दुर्ग (320), जशपुर (319), महासमुंद (316), बस्तर (315), कांकेर (314), बिलासपुर (314), कोरिया (313), कवर्धा (313), बालोद (313), धमतरी (312), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी (309), बलरामपुर (308), रायपुर (305), राजनांदगांव (303) और सारंगढ़ (301) जिलों ने ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में अपना स्थान बनाया है।
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दूसरी ओर, शैक्षणिक सूचकांक में ‘प्रचेष्टा-2’ श्रेणी में आने वाले जिलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस श्रेणी में सूरजपुर और मुंगेली (300-300 अंक), मनेन्द्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी और बेमेतरा (299-299 अंक), दंतेवाड़ा (293), खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (292), सक्ती (291), गरियाबंद और गौरेला पेंड्रा मरवाही (289-289 अंक), जांजगीर-चांपा (288), कोरबा (287), कोंडागांव (281), नारायणपुर (264) और सुकमा (255) जिले शामिल हैं।
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राज्य के समग्र शैक्षिक ढांचे का आकलन करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ वर्तमान में ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी का हिस्सा है। राज्य ने कुल 1000 अंकों में से 578.9 अंक अर्जित किए हैं। रिपोर्ट का सबसे गंभीर पहलू बुनियादी सुविधाओं और सीखने के परिणामों पर केंद्रित है। आधारभूत सुविधाओं के लिए निर्धारित 260 अंकों में से राज्य को मात्र 90.78 अंक प्राप्त हुए हैं, वहीं सीखने की गुणवत्ता के मापदंड पर राज्य को 240 में से केवल 72.9 अंक मिले हैं।
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शिक्षाविदों का मानना है कि बलरामपुर जैसे जिलों का ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में शामिल होना एक सकारात्मक संकेत है, परंतु राज्य की समग्र स्थिति में सुधार के लिए केवल कागजी आंकड़ों से आगे बढ़कर धरातल पर व्यापक बदलाव की आवश्यकता है। शिक्षण पद्धतियों के आधुनिकीकरण, शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण और शिक्षा प्रशासन में कसावट लाकर ही इन शैक्षिक अंतराल को पाटा जा सकता है। यह रिपोर्ट स्पष्ट संदेश देती है कि आगामी वर्षों में बुनियादी ढांचे और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को और अधिक आक्रामक नीति अपनानी होगी।

