CG: 31 दिसंबर को होगी मंत्रिपरिषद की बैठक

जशपुर फैज़ान अशरफ

क्रिसमस के पावन अवसर पर पूरे देश में उत्सव का माहौल है। बाजार सजे हुए हैं और चर्चों में विशेष प्रार्थनाओं की तैयारी चल रही है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत जशपुर जिले में भी क्रिसमस की रौनक देखते ही बनती है। इसी जशपुर जिले के कुनकुरी नगर में स्थित महागिरिजाघर एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च होने के कारण पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है।

कुनकुरी में स्थित यह भव्य महागिरिजाघर न केवल ईसाई समुदाय की आस्था का प्रमुख केंद्र है बल्कि यह अद्भुत वास्तुकला का भी अनुपम उदाहरण माना जाता है। दूर से ही इसकी विशाल संरचना श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। क्रिसमस के अवसर पर यहां हजारों की संख्या में लोग प्रभु यीशु के जन्मोत्सव में शामिल होने पहुंचते हैं।

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इस महागिरिजाघर की नींव वर्ष 1962 में रखी गई थी। उस समय कुनकुरी धर्मप्रांत के बिशप स्टानिस्लास लकड़ा थे। इस विशाल भवन को एक ही बीम के सहारे खड़ा करने के लिए नींव को विशेष रूप से डिजाइन किया गया था और केवल नींव तैयार करने में ही करीब दो वर्ष का समय लग गया। इसके बाद लगभग 13 वर्षों में चर्च का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। जब यह महागिरिजाघर बन रहा था तब चारों ओर जंगल और पहाड़ियां थीं लेकिन समय के साथ यह क्षेत्र विकसित होकर एक व्यवस्थित नगर का रूप ले चुका है।

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इस चर्च की सबसे बड़ी विशेषता इसमें निहित सात अंक का महत्व है। महागिरिजाघर में सात छत और सात दरवाजे बनाए गए हैं। कैथोलिक परंपरा में सात अंक को विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। सप्ताह के सात दिन और सातवां दिन प्रभु को समर्पित होने की मान्यता इसी आस्था से जुड़ी है। आश्चर्य की बात यह है कि चर्च की सभी सात छतें एक ही बीम पर टिकी हुई हैं जो इसकी इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती हैं।

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यह महागिरिजाघर इतना विशाल है कि इसके भीतर एक साथ लगभग दस हजार श्रद्धालु बैठकर प्रार्थना कर सकते हैं। क्रिसमस और ईस्टर जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां विशेष आयोजन होते हैं। इस वर्ष भी क्रिसमस का पर्व सादगी और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।

गौरतलब है कि एशिया का सबसे बड़ा चर्च नागालैंड में स्थित है जबकि दूसरा स्थान कुनकुरी के इस महागिरिजाघर को प्राप्त है। कुनकुरी से करीब 11 किलोमीटर दूर गिनाबाहर में वर्ष 1917 में क्षेत्र का पहला चर्च स्थापित हुआ था। उस समय कुनकुरी एक छोटा सा गांव हुआ करता था लेकिन महागिरिजाघर के निर्माण के बाद यहां लोयोला स्कूल और होली क्रॉस अस्पताल जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना हुई।

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चर्च बनने के साथ ही कुनकुरी का विकास एक शहर के रूप में होने लगा। शिक्षा स्वास्थ्य व्यापार और बाजारों का विस्तार हुआ और आज यहां दस हजार से अधिक परिवार निवास करते हैं। इस तरह कुनकुरी का महागिरिजाघर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और शैक्षणिक विकास का भी आधार स्तंभ बन चुका है।

क्रिसमस डे के इस खास अवसर पर जशपुर का यह महागिरिजाघर आस्था संस्कृति और स्थापत्य का ऐसा प्रतीक है जो छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश को गर्व की अनुभूति कराता है।

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