मुख्यमंत्री जिस रामगढ़ की पहाड़ियों में हाथ जोड़कर फोटो खिंचवा रहे थे, उन ऐतिहासिक स्थलों को भी अडानी के मुनाफे के लिए कुर्बान कर चुकी है सरकार

रायपुर/ 02 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में वन क्षेत्र में वृद्धि के दावों को तथ्यहीन बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि असलियत यह है कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार आने के बाद से दो हजार हेक्टेयर से अधिक सघन वन कांटे गए हैं। वर्ष 2023-24 में 1069.26 हेक्टेयर और 2024-25 में 1072.32 हेक्टेयर, केवल दो वर्षों में ही मोदी के मित्रों के खनन परियोजनाओं के लिए 2140.58 हेक्टेयर अर्थात 5137 एकड़ से अधिक जंगलों को बेरहमी से कांटा गया है। विशेष रूप से हसदेव अरण्य, धरमजयगढ़, सरगुजा, कोरबा और सूरजपुर जिले में कोल खनन, मैनपाट में बॉक्साइड, बैलाडीला, कांकेर में लौह अयस्क खदाने ग्राम सभा के अधिकारों को बाइपास करके आबंटित किए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और अबूझमाड़ जैसे क्षेत्रों में अतिक्रमण के कारण लाखों पेड़ काटे गए हैं, जिससे जैव विविधता और स्थानीय आदिवासी आजीविका प्रभावित हुई है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि कल मुख्यमंत्री साय जिस रामगढ़ की पहाड़ियों में हाथ जोड़कर फोटो खिंचवा रहे थे उन स्थलों को भी अडानी के मुनाफे के लिए कुर्बान कर चुकी है यह सरकार। प्राचीन नाट्यशाला, सीता गुफा, जानकी रसोई और ऐतिहासिक सुरंग भी इस सरकार में असुरक्षित हो गई है। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने 27 जुलाई 2022 को परसा कोल सहित पांच कोल ब्लॉक आबंटन निरस्त करने विधानसभा में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार को भेजा था, नंदराज पर्वत में ग्रामसभा की फर्जी एन ओ सी की जांच करके उसे भी निरस्त करने केंद्र सरकार को सूचित किया था लेकिन छत्तीसगढ़ में सरकार बदलते ही वहां पर भी जंगलों की कटाई शुरू हो गई।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि हसदेव अरण्य, जिसे ‘‘मध्य भारत के फेफड़ों’’ के रूप में जाना जाता है, सघन जंगलों और हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के लिए प्रसिद्ध है, वहां पर नई खनन परियोजनाएं शुरू कर दी गई है। परसा ईस्ट केते बासेन (PEKB) और केते एक्सटेंशन जैसी कोयला खदानों के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही है। हसदेव-अरण्य कोलफील्ड्स क्षेत्र में खनन के लिए लाखों पेड़ों को काटने की मंजूरी भाजपा के दोहरे चरित्र का प्रमाण है। संसाधनों के असंतुलित दोहन, अंधाधुंध खनन और वनों की कटाई से हजारों आदिवासी विस्थापित हो रहे हैं, वन्य जीवों का प्राकृतिक रहवास छीना जा रहा है। सरकार का दावा है कि प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के तहत काटे गए पेड़ों से कई गुना अधिक पौधे लगाए जा रहे हैं, वन क्षेत्र का रकबा ढ़ाई प्रतिशत बढ़ा है, लेकिन धरातल पर हालात इसके विपरीत है।

 

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