रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को सदन में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब शून्य काल में दुर्ग जिले में सामने आई अफीम की खेती का मुद्दा गूंजा। विपक्ष ने इस मामले को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया और आरोप लगाया कि प्रदेश की पहचान रहे ‘धान के कटोरे’ को अब ‘अफीम का कटोरा’ बनाया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विपक्षी विधायकों ने सदन के गर्भगृह में उतरकर नारेबाजी की, जिसके चलते वे स्वमेव निलंबित हो गए और हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को 5 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
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नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मामले की शुरुआत करते हुए कहा कि राजधानी से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर विनायक ताम्रकार नामक व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर धड़ल्ले से अफीम की खेती कर रहा है। उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जब किसानों के धान की खरीदी में बाधाएं आ रही हैं, तब दूसरी तरफ सामूहिक संरक्षण में नशे की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। महंत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि छत्तीसगढ़ को सुलझे नशे से बर्बाद किया जा रहा है और शासन इसमें शामिल लोगों को बचाने का प्रयास कर रहा है।
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे ‘लीपापोती’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अफीम की खेती ग्रामीणों ने पकड़ी थी, लेकिन एफआईआर में मुख्य आरोपी के बजाय नौकर को सामने कर दिया गया है। बघेल ने आरोप लगाया कि एफआईआर इतनी लाचार बनाई गई है कि मुख्य आरोपी का नाम तीसरे नंबर पर रखा गया है। उन्होंने चिंता जताई कि अब तक नशे का केवल आना-जाना होता था, लेकिन अब छत्तीसगढ़ की धरती पर ही अफीम पैदा की जा रही है, जो बेहद खतरनाक संकेत है।
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इस तीखे हमले का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष की ओर से विधायक अजय चंद्राकर ने मोर्चा संभाला और आरोप लगाया कि यह अवैध खेती आज से नहीं बल्कि पिछले 4 वर्षों से जारी थी। उन्होंने इसकी भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए पाटन से इसकी दूरी का जिक्र किया और मामले में कांग्रेस की संलिप्तता होने की बात कही।
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मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए उप-मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पुलिस ने किसी सरपंच की नहीं बल्कि मुखबिर की सूचना पर 6 मार्च को त्वरित कार्रवाई की थी। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई इस कार्रवाई में 6 हजार 242 किलोग्राम अफीम जब्त की गई और न्यायिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार नशे के खिलाफ पूरी तरह सख्त है और प्रदेश भर में टास्क फोर्स गठित कर सप्लायरों के खिलाफ फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन भी की जा रही है, जिसके तहत अब तक 16 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
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